कोटवा में पैक्सो में धान खरीद की रफ्तार धीमी, किसान हो रहे परेशान

कोटवा में पैक्सो में धान खरीद की रफ्तार धीमी, किसान हो रहे परेशान
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– पैक्सो का 2 करोड़ 90 लाख का सीसी स्वीकृत, महज दो पैक्स हैं सक्रिय
– पैक्स अध्यक्षों ने बीसीओ को बताया जिम्मेवार, -डीसीओ ने कहा होगी कारवाई
– डीडीसी की रडार पर बीसीओ
पूर्वी चंपारण। जिले के कोटवा प्रखंड क्षेत्र के पैक्सो पर उनके कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगा है। किसानों के हित के लिए काम करने वाला पैक्स लोगो के समझ से परे हो रहे है, ऐसे में किसान समझ नहीं पा रहे है कि आखिरकार पैक्स कर क्या रहा है। इस वर्ष धान खरीद की प्रक्रिया सुस्त पड़ी हुई है। सरकार द्वारा जहा किसानों के हित में एमएसपी निर्धारित कर फसलों की खरीद का एक मानक तय कर दिया गया है, वहीं धान की खरीदारी लगभग नहीं के बराबर हो रही है। बता दे कि कुल 13 पैक्स और 1 व्यापार मंडल को धान खरीद के लिए चयनित किये गए है। स्थानीय स्तर पर सभी पैक्स को दो-दो लॉट का लक्ष्य आवंटित कर दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार एक लॉट में 43 मैट्रिक टन धान का खरीद निर्धारित होता है। इसी आधार पर सभी पैक्स को दो लॉट का लक्ष्य दिया गया है। प्रत्येक पैक्स को दो लॉट के लिए कुल 20 लाख 60 हजार रुपये का सीसी स्वीकृत किया गया है। ऐसे पूरे प्रखंड में पैक्सो को लगभग 2 करोड़ 90 लाख रुपये का सीसी अनुमोदित किया गया है, बावजूद इसके अभी तक केवल बथना और कररिया पैक्स में ही धान खरीद की शुरुआत हो पाई है, जबकि शेष पैक्स लक्ष्य मिलने के बाद भी धान उठाव शुरू नहीं कर सके हैं।

इससे इतर जरूरतमंद किसान औने पौने दाम में अब धान विक्री करने को मजबूर हो रहे है। दूसरी ओर कई पैक्स अध्यक्षों ने गंभीर आरोप लगाए है, उनका कहना है कि बीसीओ अनिल शर्मा न तो नियमित रूप से प्रखंड कार्यालय आते हैं और न ही कॉल रिसीव करते हैं। ऐसे में उनके इस तह के रवैए का असर भी सीधे तौर पर धान की खरीद पर हो रहा है। इस संबंध में डीसीओ प्रिंस अनुपम ने बताया कि सभी पैक्स को जल्द से जल्द धान खरीद शुरू करने का निर्देश जारी किया गया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वाले पैक्स पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बीसीओ के खिलाफ पहले भी शिकायतें आई हैं।  यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन पर  विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वही किसानो का कहना है कि इस मामले में अब जिला प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए, अन्यथा ऐसे ही देखते देखते समय निकल जायेगा और बाद में कागजों में खानापूर्ति कर दी जायेगी।

anand prakash

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