जल जीवन मिशन के तहत पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायतों की बढ़ेगी भूमिका

जल जीवन मिशन के तहत पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायतों की बढ़ेगी भूमिका
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक सुरक्षा और जलापूर्ति व्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए ग्राम पंचायतों की भूमिका बढ़ाएगी।इसके लिए जल जीवन मिशन 2.0 को विकसित ग्राम रोजगार एवं आजीविका गारंटी कार्यक्रम (वीबी-जी राम जी) के साथ जोड़ा जाएगा। केंद्र और राज्यों के बीच इस समन्वय से भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और पेयजल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को वैज्ञानिक तरीके से प्राथमिकता दी जाएगी।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बुधवार को जल विषयक विभागीय शिखर सम्मेलन-2026 के बाद राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ तीसरा आभासी सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में पेयजल स्रोतों की स्थिरता, जल सुरक्षा और ग्राम पंचायतों के नेतृत्व में योजनाएं तैयार करने पर चर्चा हुई। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक केके मीणा ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल ढांचे का विस्तार हुआ है। अब दूसरे चरण में इन परिसंपत्तियों की दीर्घकालिक उपयोगिता, विश्वसनीयता और रखरखाव सुनिश्चित करना जरूरी है।

मीणा ने कहा कि पेयजल सेवाओं को टिकाऊ बनाने के लिए जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्भरण और नियमित रखरखाव आवश्यक है। विकसित ग्राम रोजगार एवं आजीविका गारंटी कार्यक्रम के तहत जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के रखरखाव से जुड़े कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने राज्यों से जल जीवन मिशन की ग्राम कार्ययोजनाओं और स्रोत स्थिरता योजनाओं को विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं तथा ग्राम पंचायत विकास योजना के साथ जोड़ने को कहा।

उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा से जुड़े कार्य स्थानीय जल संसाधनों के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर तय होने चाहिए। ग्राम सभा की मंजूरी से इन योजनाओं को लागू करने पर समुदाय की भागीदारी और जवाबदेही बढ़ेगी। ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और स्थानीय संस्थाओं को जल स्रोतों, मौसमी बदलावों तथा स्थानीय जरूरतों की जानकारी होती है। इसलिए योजना बनाने, कार्यान्वयन और निगरानी में उनकी सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की सहायक आयुक्त दीक्षा एस बिष्ट ने बताया कि विकसित ग्राम रोजगार एवं आजीविका गारंटी कार्यक्रम के तहत जल सुरक्षा से जुड़े 128 प्रकार के कार्य किए जा सकते हैं। इनमें भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन, जलग्रहण क्षेत्र का उपचार, जल निकायों का पुनर्जीवन, पेयजल स्रोतों का संरक्षण और जल संबंधी परिसंपत्तियों का रखरखाव शामिल है। उन्होंने जल संकट वाले क्षेत्रों में भूजल की स्थिति और स्थानीय जरूरतों के आधार पर कार्यों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।

ओडिशा ने भूजल पुनर्भरण, घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन, जलग्रहण क्षेत्र के उपचार, स्रोत संरक्षण और जलवायु के अनुकूल जल ढांचे से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मध्य प्रदेश ने ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव में ग्राम पंचायतों की भूमिका और वर्षा जल संचयन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

राजस्थान ने ग्रामीण जलापूर्ति ढांचे के निवारक, सुधारात्मक और आपातकालीन रखरखाव के लिए विकसित ग्राम रोजगार एवं आजीविका गारंटी कार्यक्रम के साथ समन्वय का खाका प्रस्तुत किया।राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के उप सलाहकार सुमित प्रियदर्शी ने निर्णय सहायता प्रणाली के इस्तेमाल पर प्रस्तुति दी।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता से जुड़े जोखिमों का सामना कर रहे पेयजल स्रोतों की पहचान में मदद करती है। राज्यों से आंकड़ों के आधार पर जोखिम वाले गांवों और बस्तियों की पहचान करने, मौके पर जांच के जरिए जोखिम की पुष्टि करने और सुधारात्मक कार्यों के परिणामों की निगरानी करने को कहा गया।

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोन ने कहा कि विकसित ग्राम रोजगार एवं आजीविका गारंटी कार्यक्रम के तहत होने वाला निवेश उन पेयजल चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित होना चाहिए, जिनकी पहचान निर्णय सहायता प्रणाली के जरिए की गई है। उन्होंने कहा कि जल संबंधी कार्यों पर होने वाला खर्च जल सुरक्षा में मापने योग्य सुधार के रूप में दिखाई देना चाहिए।

anand prakash

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