प्रशांत किशोर ने एमएलसी चुनाव को लेकर की सभा
नालंदा।बिहार विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर जन सुराज की ओर से आज मंगलवार को बिहारशरीफ के कर्पूरी भवन टाउन हॉल में सभा आयोजित की गई।कार्यक्रम में जन सुराज के सूत्रधार एवं बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर शामिल हुए। सभा में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह भी मौजूद रहे।
जन सुराज ने डॉ. अनुज सिंह को पटना स्नातक और डॉ. दिव्या ज्योति को पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है।सभा के दौरान प्रशांत किशोर ने दोनों प्रत्याशियों के साथ चुनावी मुद्दों पर चर्चा की और मतदाताओं से उनके पक्ष में मतदान करने की अपील की।प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज ने शिक्षकों के लिए तीन प्रमुख बातों को लेकर आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा कि सभी श्रेणी के शिक्षकों को सम्मान के साथ सातवां वेतनमान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वित्तरहित और वित्तपोषित संस्थानों से जुड़े शिक्षकों की समस्याओं के समाधान तथा बचे हुए शिक्षकों के समायोजन की दिशा में काम किया जाएगा।उन्होंने कहा कि शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य लिए जाने को लेकर भी एक मानक तय किया जाएगा, ताकि शिक्षक प्राथमिकता के साथ शिक्षण कार्य कर सकें।वहीं स्नातक मतदाताओं से जाति और धर्म से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्नातक मतदाता पढ़े-लिखे और जागरूक मतदाता हैं। यदि वे अपनी स्थिति में बदलाव चाहते हैं तो इस बार नई व्यवस्था के लिए जन सुराज के प्रत्याशियों को मौका दें।उन्होंने दावा किया कि जिस स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज का प्रत्याशी जीतता है, वहां बांकीपुर की तर्ज पर 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार देने के वादे को लागू किया जाएगा।
प्रशांत किशोर ने नालंदा क्षेत्र से जुड़े पाली भाषा के रिसर्च सेंटर को ओडिशा ले जाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इसे बिहार के विकास और राजनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की सरकार दिल्ली से संचालित हो रही है और केंद्र के निर्देशों के अनुसार काम कर रही है।उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को बिहार से बाहर रोजगार के लिए गए युवाओं की वापसी और राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए।हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और दावों को प्रशांत किशोर के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

