सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने पीपल के पत्ते पर मां दुर्गा की तस्वीर बना नारी शक्ति का दिया संदेश
मोतिहारी। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर जहां पूरा देश मां दुर्गा की आराधना में लीन है। विश्व प्रसिद्ध रेत कलाकार मधुरेन्द्र कुमार ने अपनी सूक्ष्म लीफ आर्ट के माध्यम से महिला सुरक्षा और सम्मान का संदेश दिया है। देश में लड़कियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं से आहत होकर उन्होंने महज तीन सेंटीमीटर के हरे पीपल के पत्ते पर मां दुर्गा की तस्वीर उकेरी है।
मधुरेन्द्र कुमार की इस कलाकृति का केंद्रीय आकर्षण सिंह पर सवार मां दुर्गा का सूक्ष्म चित्र है। मां के अनेक हाथों में त्रिशूल, तलवार, धनुष-बाण सहित विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों को दर्शाया गया है। कलाकृति में शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की भावना को प्रमुखता दी गई है। पीपल के पत्ते को कैनवास बनाकर तैयार की गई यह कलाकृति आकार में भले ही बेहद छोटी है, लेकिन इसका सामाजिक संदेश व्यापक है।
कलाकार ने इस सूक्ष्म चित्र के माध्यम से नवरात्र की धार्मिक आस्था को महिला सम्मान और सुरक्षा जैसे गंभीर सामाजिक विषय से जोड़ने का प्रयास किया है।इस कलाकृति की खासियत केवल मां दुर्गा की तस्वीर नहीं, बल्कि महिलाओं की बहुआयामी प्रतिभा का चित्रण भी है।
जाहिर है कलाकार का संदेश है कि जिस समाज में महिलाओं को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना जाता है, उसी समाज में उनके प्रति छेड़छाड़, उत्पीड़न और भेदभाव जैसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। महिलाओं का सम्मान केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके दैनिक जीवन में भी दिखाई देना चाहिए। मधुरेन्द्र ने अपनी इस कलाकृति के माध्यम से देशवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाने की अपील की है।
मधुरेन्द्र कुमार ने कहा, “मां दुर्गा शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रतीक हैं। नवरात्र में हम देवी की पूजा करते हैं, लेकिन हमारा कर्तव्य है कि हम हर बेटी और महिला को भी सम्मान और सुरक्षा दें। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्या है। तीन सेंटीमीटर के पीपल के पत्ते पर यह कलाकृति बनाकर संदेश देने की कोशिश की है कि हर महिला को भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार है। मेरी अपील है कि मां दुर्गा की आराधना के साथ हम महिला सम्मान और सुरक्षा का संकल्प भी लें।” दुर्गा की यह नई कलाकृति इसी रचनात्मक प्रयोग का उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि मधुरेन्द्र विभिन्न कला आयोजनों और सार्वजनिक अवसरों पर अपनी रचनात्मकता के माध्यम से पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियों में लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से जुड़ा सम्मान भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, सोनपुर मेले में भगवान विष्णु और गज-ग्राह प्रसंग पर आधारित 50 रेत कलाकृतियों के प्रदर्शन तथा एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज उपलब्धि का भी उल्लेख उनके कला सफर में किया जाता है।

