राघोपुर में गंगा का भीषण कटाव, बिहपुर-महादेवपुर रेललाइन पर मंडराया खतरा

राघोपुर में गंगा का भीषण कटाव, बिहपुर-महादेवपुर रेललाइन पर मंडराया खतरा
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पटना/भागलपुर। जिले के नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर में गंगा नदी का विनाशकारी कटाव विकराल रूप ले चुका है। 220 मीटर लंबे जमींदारी बांध का 150 मीटर हिस्सा नदी में समा गया है, जिससे ऐतिहासिक बिहपुर-महादेवपुर रेललाइन और विक्रमशिला सेतु के पहुंच पथ पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राघोपुर क्षेत्र में पिछले दस दिनों से गंगा नदी का भीषण कटाव विकराल रूप धारण कर चुका है। नदी की लहरों ने राघोपुर-खैरपुर के समीप बने लगभग 220 मीटर लंबे ऐतिहासिक जमींदारी बांध के करीब 150 मीटर हिस्से को अपने आगोश में ले लिया है। अब कटाव का सीधा खतरा ऐतिहासिक थाना बिहपुर-महादेवपुर रेललाइन और विक्रमशिला सेतु पहुंच पथ तक पहुंच गया है।

उधर पुलिस माइकिंग कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारी, दर्जनों इंजीनियर और डेढ़ दर्जन संवेदक दिन-रात फ्लड फाइटिंग में जुटे हैं, लेकिन मुख्य धारा के किनारे शिफ्ट होने से धारा की प्रचंड गति के आगे सारे सुरक्षात्मक उपाय बौने साबित हो रहे हैं।

राघोपुर-खैरपुर के पास 220 मीटर लंबे जमींदारी बांध का 150 मीटर हिस्सा पूरी तरह कटकर नदी के गर्भ में समा चुका है। बचे हुए महज 70 मीटर हिस्से पर पानी का जबर्दस्त थपेड़ा जारी है। मुख्य धारा के अचानक तटबंध की ओर मुड़ जाने के कारण कटाव की गति कई गुना बढ़ गई है, जिससे तटबंध की नींव खोखली हो रही है।

यह कटाव अब केवल कृषि भूमि या बांध तक सीमित न रहकर पूरे अनुमंडल के लाइफलाइन नेटवर्क पर हमला बन चुका है। यदि जमींदारी बांध का शेष हिस्सा कट गया और गंगा का रुख आगे बढ़ा, तो ऐतिहासिक थाना बिहपुर-महादेवपुर रेलखंड का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।रेललाइन का सुरक्षा घेरा टूटने से गंगा का पानी सीधे रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर जाएगा, जिससे पूरे नवगछिया अनुमंडल में भारी तबाही मच सकती है। रेललाइन के साथ-साथ यह पानी सीधे विक्रमशिला सेतु के पहुंच पथ को भी अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार का सड़क संपर्क पूरी तरह ठप होने का अंदेशा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। विभाग के अभियंता प्रमुख और मुख्य अभियंता सहित वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की पूरी टीम मौके पर कैंप किए हुए है। डेढ़ दर्जन से अधिक ठेकेदारों और सैकड़ों मजदूरों द्वारा 24 घंटे एनसी बंबू रोल, जियो बैग और ‘हाथी पांव’ (कंक्रीट/बोल्डर नेट) डालकर धारा को मोड़ने और कटाव रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

गंगा की धारा की गति इतनी तीव्र है कि गिराई जा रही बचाव सामग्री और बालू की बोरियां तक बह जा रही हैं। जलस्तर में आंशिक स्थिरता के बावजूद कटाव की आक्रामकता तनिक भी कम नहीं हुई है।स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गंगा की विनाशकारी धारा को रेललाइन और मुख्य संपर्क मार्गों तक पहुंचने से पहले रोका जा सकेगा, ताकि नवगछिया को एक बड़े जलप्रलय से बचाया जा सके।

उधर पुलिस माइकिंग के जरिए लोगों को सुरक्षित जगह जाने की अपील करते दिख रहे हैं।

anand prakash

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