संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर मंथन, शिवराज बोले – बार-बार चुनाव विकास में बाधक

संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर मंथन, शिवराज बोले – बार-बार चुनाव विकास में बाधक
Facebook WhatsApp

मुख्यमंत्री धामी बोले-राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा है ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का विषय

हरिद्वार। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे देशहित में आवश्यक बताते हुए संत समाज से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के पक्ष में जनजागरण करने की अपील की।

हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में रविवार को आयोजित संत समागम कार्यक्रम को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में बार-बार होने वाले चुनाव विकास की निरंतर गति में बाधक बन रहे हैं।

चुनाव प्रक्रिया में समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों का बड़ा हिस्सा खर्च होता है। बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक मशीनरी चुनावी तैयारियों में लग जाती है, जबकि शिक्षकों, पुलिस और अन्य कर्मचारियों की सेवाएं भी चुनाव ड्यूटी में लगाई जाती हैं। इससे विकास एवं जनकल्याण के कार्य प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो संसाधनों और समय की बचत होगी तथा प्रशासन का अधिक ध्यान विकास कार्यों पर केंद्रित किया जा सकेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय है।

देश पहले है और राजनीतिक दल उसके बाद हैं।केंद्रीय मंत्री ने उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं की समाज में व्यापक स्वीकार्यता और प्रभाव है। यदि संत अपने प्रवचनों और संवाद के माध्यम से इस विषय पर लोगों को जागरूक करेंगे तो यह विचार जन-जन तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि देशहित में होने वाले इस संवैधानिक परिवर्तन के लिए व्यापक जनसमर्थन आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण स्वरूप का समर्थन करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने संत समाज से आग्रह किया कि वे अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों में राष्ट्रभाव और एकता की भावना को मजबूत करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और देश के संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र का महत्वपूर्ण पर्व हैं, लेकिन लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का प्रभाव शासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने पर आदर्श आचार संहिता लागू होती है और बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, पुलिस एवं सुरक्षा बल चुनाव संबंधी दायित्वों में जुट जाते हैं। ऐसे में यदि एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन और संसाधनों की बचत होती है तथा प्रशासन को जनसेवा एवं विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाते हुए इसे आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए विकास की निरंतर गति आवश्यक है। शासन का अधिकतम समय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में लगाया जाना चाहिए।

उन्होंने संत-महात्माओं से इस विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने सदैव राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य किया है। हमारा संकल्प मजबूत लोकतंत्र, निरंतर विकास, सुरक्षित संस्कृति और राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का है।

इस दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज, निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष ज्ञानदेव महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता करौली शंकर महाराज, दाती महाराज, साध्वी प्राची, महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज, श्रीमहंत जगतार मुनि, स्वामी हरिचेतनांनद, महामण्डलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि समेत बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page