जेपीएससी-जेएसएससी मुद्दों पर मंत्रियों से आदिवासी छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने की वार्ता

जेपीएससी-जेएसएससी मुद्दों पर मंत्रियों से आदिवासी छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने की वार्ता
Facebook WhatsApp

रांची। जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आदिवासी छात्र संघ (एसीएस) के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ वार्ता की।प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. सुशील कुमार मिंज ने किया। बैठक में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय की समिति के सदस्य भी शामिल हुए।

बैठक में छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा व्यवस्था, नियोजन नीति, स्थानीय नीति तथा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े विषय मंत्रियों के समक्ष रखे।

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मंत्रियों ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना और उनकी मांगों एवं सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। बैठक में छात्र हित से जुड़े मुद्दों के समाधान और आगे की कार्रवाई को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई।

बैठक में राज्य सरकार की ओर से मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार सोनू और चमरा लिंडा समेत अन्य मंत्री मौजूद रहे।प्रतिनिधिमंडल ने जेपीएससी एवं जेएसएससी से जुड़े मामलों में उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा 1932 के खतियान को आधार बनाकर झारखंड की नियोजन एवं स्थानीय नीति तैयार करने की मांग रखी गई।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में बैकलॉग के रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती शुरू करने की मांग भी की। साथ ही जेपीएससी के पाठ्यक्रम में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अंकों को बढ़ाने और उन्हें अनिवार्य करने की मांग की गई।

रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई पूर्व की व्यवस्था के अनुसार जारी रखने तथा क्लस्टर प्रणाली को तत्काल समाप्त करने की मांग भी प्रतिनिधिमंडल ने रखी।प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाला राज्य है, लेकिन आदिवासी युवाओं को अब तक पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिल सके हैं। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि राज्य की नौकरियों में बाहरी लोगों को अवसर मिलने से स्थानीय युवाओं के हित प्रभावित हो रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नियोजन और भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा तथा परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल में सुरेश टोप्पो, अमित मुंडा, अमृत मुंडा, अखिलेश पहान, सुजीत भगत, बादल भोगता, प्रभात उरांव, सुभाष मुंडा, शनि कुमार, महावीर उरांव, जतिर उरांव, शिवराम कच्छप और अशोक उरांव समेत अन्य सदस्य शामिल रहे।

anand prakash

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page