बिहार विधानसभा में गूंजा स्कूलों की बदहाली का मुद्दा, मुख्यमंत्री ने छह महीने में सुधार का दिया भरोसा
पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य के सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक ने जर्जर स्कूल भवनों, कमरों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मामला उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।इस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि जिन पंचायतों में हाई स्कूलों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां छह महीने के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्नकाल के दौरान राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि बिहार के लगभग 40 प्रतिशत सरकारी विद्यालय जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं या उनके भवन पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। कई विद्यालयों को दूसरे गांवों में स्थानांतरित कर चलाया जा रहा है, जबकि अनेक स्थानों पर छात्र-छात्राएं पेड़ों के नीचे अथवा अपर्याप्त कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या शिक्षा विभाग ने पूरे राज्य में विद्यालय भवनों की स्थिति का व्यापक सर्वे कराया है और यह पता लगाया है कि किन पंचायतों में स्कूल भवन पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।
कुमार सर्वजीत ने मांग की कि जर्जर विद्यालय भवनों का राज्यव्यापी सर्वे कराकर शीघ्र नए भवनों का निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि कई गांवों में पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद नए विद्यालय भवनों का निर्माण नहीं कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षकों की संख्या बढ़ाने का दावा तो करती है, लेकिन विद्यालयों का आधारभूत ढांचा बेहद कमजोर है।राजद विधायक ने शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तीसरी से छठी कक्षा तक के अनेक छात्र बुनियादी अंग्रेजी और सामान्य विषयों का अपेक्षित ज्ञान नहीं रखते। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग प्रशिक्षण कार्यक्रमों का हवाला देता है, लेकिन वास्तविक चुनौती विद्यालयों में संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं की कमी है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में केवल दो कमरों में लगभग एक हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई कराई जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बिहार विधानसभा के सभी सदस्यों की एक विशेष बैठक बुलाकर राज्य की शिक्षा व्यवस्था की समग्र समीक्षा की जाए, ताकि यह समझा जा सके कि गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से क्यों वंचित रह जा रहे हैं।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उस समय लगभग 600 से 700 पंचायतों में विद्यालय निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं थी। ऐसे क्षेत्रों में छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए जहां दो कमरे उपलब्ध थे, वहीं से विद्यालयों का संचालन शुरू कराया गया। बाद में इन विद्यालयों में क्रमशः दसवीं और फिर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई भी शुरू कराई गई।मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि विद्यालय भवनों और आधारभूत सुविधाओं को लेकर सदस्यों द्वारा उठाई गई चिंताएं गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की समीक्षा करेगी और जिन स्थानों पर हाई स्कूलों के लिए भूमि की समस्या है, वहां छह महीने के भीतर जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद नए विद्यालय भवनों के निर्माण का कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।

