मन की बात: प्रधानमंत्री ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां, जनभागीदारी को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत

मन की बात: प्रधानमंत्री ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां, जनभागीदारी को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि जून का महीना भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, विमानन क्षेत्र की नई उपलब्धियों, योग की वैश्विक स्वीकार्यता, जनभागीदारी, सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे अनेक प्रेरणादायक प्रयासों का साक्षी रहा है।उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे सकारात्मक बदलाव विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई शक्ति प्रदान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने रविवार को ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026 का आधा समय पूरा होने जा रहा है और बीते छह महीनों के दौरान देश ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। जून का महीना विशेष रूप से ऐसी सफलताओं और जनआंदोलनों का साक्षी रहा है, जिन्होंने भारत की सामरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, सामाजिक चेतना और वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच देशवासियों ने जिस जिम्मेदारी और जागरूकता का परिचय दिया है, वह भारत की सामूहिक शक्ति को दर्शाता है। सोने की खरीदारी सीमित करने, विदेश यात्राएं टालने, कार पूलिंग अपनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने संबंधी उनकी अपील को लोगों ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर देश एकजुट होकर कार्य करने के लिए सदैव तैयार रहता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अनेक परिवारों ने विवाह जैसे आयोजनों में नया सोना खरीदने के बजाय पुराने आभूषणों को पुनर्चक्रित कर उपयोग करने का निर्णय लिया है। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी विदेश यात्राएं स्थगित की हैं और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी है। लोग कार पूलिंग को अपना रहे हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की बचत हो रही है। विभिन्न राज्यों से प्राकृतिक उर्वरकों के उपयोग में वृद्धि की रिपोर्ट भी प्राप्त हो रही है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्हें कोलकाता में नौसेना से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया है। इन युद्धपोतों की डिजाइनिंग से लेकर निर्माण तक का संपूर्ण कार्य भारत में हुआ है। यह उपलब्धि केवल रक्षा क्षेत्र की सफलता नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, इंजीनियरिंग कौशल और आत्मनिर्भरता का भी प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जून में देश ने विमानन क्षेत्र में भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।’मेड इन इंडिया’ सी-295 परिवहन विमान ने अपनी पहली सफल उड़ान पूरी की है। ऐसे 40 विमान भारत में ही निर्मित किए जा रहे हैं। इससे देश के एमएसएमई क्षेत्र, एयरोस्पेस उद्योग और कौशल विकास को नई गति मिल रही है। साथ ही, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसी महीने डीआरडीओ ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि डीआरडीओ और भारतीय उद्योग जगत के साझा प्रयासों का परिणाम है। इससे भारत की रक्षा क्षमता और अधिक मजबूत हुई है तथा देश समुद्र से लेकर आकाश तक अपनी सुरक्षा को और सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति दुनिया के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही है। डोमिनिकन रिपब्लिक में ‘ब्रह्मकमल डोमिनिकाना’ नामक समूह के सदस्य वैदिक साहित्य का अध्ययन कर रहे हैं और वैदिक मंत्रों का उच्चारण सीख रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेघालय के जीवित जड़ पुल भारत की अद्वितीय धरोहर हैं। दशकों की मेहनत से तैयार ये पुल प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। भारत ने इन्हें यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय समुदाय 120 से अधिक जड़ पुलों के संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पद्म सम्मान से सम्मानित हाली वार के योगदान का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपना जीवन इन पुलों के संरक्षण को समर्पित किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इस बार भी पूरी दुनिया को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में सफल रहा। दुनिया भर में 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत में भी करोड़ों लोगों ने योग दिवस में भागीदारी की। उन्होंने कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि वैश्विक जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैम्पियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 114 पदक जीते, जिनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि देश के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि योग केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में भी दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार ने सामाजिक सरोकार का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। विवाह समारोह के अवसर पर परिवार ने लगभग 3,500 ग्रामीणों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की और प्रत्येक व्यक्ति को एक लाख रुपये का बीमा कवर उपलब्ध कराया। यह पहल दर्शाती है कि व्यक्तिगत खुशियों को सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण से भी जोड़ा जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भी करोड़ों परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत केवल 20 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जाता है। अब तक 58 करोड़ से अधिक लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं, जिनमें लगभग 28 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रभावित परिवारों को 3,700 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना भी करोड़ों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा है। केवल 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रुपये का जीवन बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना से 27 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं और लगभग 11 लाख परिवारों को 22,000 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंधविश्वास समाज को पीछे ले जाता है, जबकि विज्ञान और जागरूकता उसे आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने असम के हरगिला पक्षी के संरक्षण अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी इस पक्षी को अशुभ माना जाता था और इसके घोंसलों वाले पेड़ों तक को काट दिया जाता था।

उन्होंने कहा कि जीव वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने लोगों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर जागरूक किया और धीरे-धीरे हजारों महिलाएं इस अभियान से जुड़ गईं। आज यही महिलाएं ‘हरगिला आर्मी’ के नाम से जानी जाती हैं और इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह अभियान दिखाता है कि सही जानकारी और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से वर्षों पुरानी धारणाओं को भी बदला जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने नागालैंड बेबी लीग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल पांच से बारह वर्ष तक के बच्चों को फुटबॉल से जोड़ने का काम कर रही है। इससे बच्चों की प्रतिभा निखर रही है और खेलों के प्रति रुचि बढ़ रही है। नागालैंड महिला फुटसल लीग भी बेटियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान कर रही है। ऐसी पहलें खेलों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं और युवाओं को नई दिशा दे रही हैं।

उन्होंने ने कहा कि तकनीक के युग में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। नालंदा विश्वविद्यालय ने प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा को नए स्वरूप में पुनर्जीवित किया है। उन्होंने कहा कि संवाद, तर्क और विचार-विमर्श की यह संस्कृति विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस में बीटेक कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। इससे भारतीय भाषाओं के लिए नई तकनीक विकसित करने, प्राचीन ग्रंथों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के बियावरा की महिलाओं ने प्लास्टिक कचरे को ईको-ब्रिक्स में बदलकर पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। जो प्लास्टिक कभी प्रदूषण का कारण था, वही अब सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण में उपयोग हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी गणेश उत्सव के अवसर पर लोगों को मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने लोगों से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों से बचने और स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित प्रतिमाएं खरीदने का आग्रह किया। ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल आर्थिक अभियान नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और सामाजिक शक्ति को बढ़ाने का माध्यम भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने ‘कैच द रेन’ अभियान को और मजबूत बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्षा जल की एक-एक बूंद बचाना देश के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने देशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।

anand prakash

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