सीजेपी के प्रदर्शन में पहुंचे सोनम वांगचुक कहा- शिक्षा में केवल परीक्षाओं को सुधारना काफी नहीं, पूरे ‘सिस्टम’ को बदलना होगा
नई दिल्ली। लद्दाख से दिल्ली आए सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरेच जनता पार्टी के नाम से चले सोशल मीडिया अभियान के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शन में भाग लिया।इस दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए वांगचुक ने कहा कि केवल परीक्षा प्रक्रिया में सुधार काफी नहीं है, हमें बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा।
अपने संबोधन में वांगचुक ने सरकार और व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग उठाई। उन्होंने एक बड़ा प्रस्ताव रखा और मांग की कि शिक्षा नीति बनाने वाले से लेकर सभी चुने हुए जनप्रतिनिधि और सरकारी वेतन पाने वाले अधिकारी अपने बच्चों को भी अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाएं। उन्होंने इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सराहना की और इसे विरोध के बजाय सरकार से किया गया एक ‘आग्रह’ बताया।
हालिया परीक्षा विवादों पर बोलते हुए सोनम ने कहा कि शिक्षा का सवाल युवाओं की ज़िंदगी से सीधे जुड़ा है। जिस परीक्षा पर देश का युवा भरोसा करता है, अगर उसी में बेइमानियां होने लगें तो उम्मीदें टूट जाती हैं। युवाओं का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यह युवाओं की बिल्कुल जायज मांग है। वे परीक्षाओं में केवल ईमानदारी मांग रहे हैं, कोई चांद-सितारे नहीं मांग रहे हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे शीर्ष नेता इस पर खरे उतरेंगे और आने वाले दिनों में कोई अच्छा समाचार मिलेगा।
उन्होंने निजी स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरों में तो शिक्षा की गुणवत्ता मिल जाती है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब गांवों के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधरेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी स्कूल नहीं, बल्कि गांव के सरकारी विद्यालय ही ‘विकसित भारत’ के असली कारखाने हैं।
इस्तीफे और जवाबदेही के मुद्दे पर बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में नारों से किसी का इस्तीफा मांगने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए, बल्कि नेताओं को खुद अपनी आत्मा की आवाज पर जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
इसी बीच सोनम ने कहा कि अगर शिक्षा से जुड़ी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपेक गिरफ्तारी होती है तो वे इस बार 42 दिन के अनशन पर बैठेंगे।
इस दौरान यहां मौजूद सीजेपी के समर्थकों ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर एकसाथ आवाज उठाई।

