वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक संपन्न,सांस्कृतिक सहयोग और साझा विरासत संरक्षण पर विशेष जोर

वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक संपन्न,सांस्कृतिक सहयोग और साझा विरासत संरक्षण पर विशेष जोर
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी वाराणसी में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (सीडब्ल्यूजी) की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को संपन्न हो गई। बैठक के अंतिम दिन सदस्य देशों ने साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने तथा सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी के लिए संस्थागत तंत्र विकसित करने पर व्यापक विचार-विमर्श किया।नदेसर स्थित एक होटल में आयोजित बैठक के दौरान दूसरे दिन दो महत्वपूर्ण सत्रों में सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन हुआ। प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, अवैध रूप से विदेश ले जाई गई सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी तथा साझा विरासत के संरक्षण के लिए सहयोगात्मक उपायों पर चर्चा की।

बैठक में यूनेस्को विश्व धरोहर, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) तथा मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड (एमओडब्ल्यू) कार्यक्रमों के अंतर्गत संयुक्त नामांकन को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों-ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इंडोनेशिया और भारत-के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। रूस, इथियोपिया और मिस्र के प्रतिनिधि हाइब्रिड माध्यम से बैठक से जुड़े।

बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने की। इस दौरान भारत के संस्कृति ट्रैक के अंतर्गत निर्धारित प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई। सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, रचनात्मक उद्योगों के विकास तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रतिनिधियों ने विरासत प्रबंधन के लिए प्रभावी संस्थागत रणनीतियों के विकास तथा सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी से संबंधित प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। बैठक में यह सहमति बनी कि सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देकर ब्रिक्स देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है।

anand prakash

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