द्वितीय केदार मदमहेश्वर मंदिर के कपाट वैदिक विधि-विधान से खुले

द्वितीय केदार मदमहेश्वर मंदिर के कपाट वैदिक विधि-विधान से खुले
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रूद्रप्रयाग। द्वितीय केदार के नाम से प्रसिद्ध मदमहेश्वर मंदिर के कपाट गुरुवार को पूर्वाह्न 11:30 बजे कर्क लग्न में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि भगवान मदमहेश्वर का आशीर्वाद सभी भक्तों पर बना रहे। वहीं बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि यात्रा को लेकर समिति की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली 19 मई को ओंकारेश्वर मंदिर से प्रथम पड़ाव राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी। 20 मई को डोली हक-हकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची और गुरुवार प्रातः वहां से प्रस्थान कर श्री मदमहेश्वर धाम पहुंची, जहां निर्धारित मुहूर्त में कपाट खोले गए।

इससे पूर्व 19 मई को ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से रावल भीमाशंकर लिंग तथा मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली को विधिवत प्रस्थान कराया था। मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने बताया कि कपाट खुलने के दिन 1135 श्रद्धालु दर्शन के लिए धाम पहुंचे। कपाट खुलने की प्रक्रिया के अंतर्गत पुजारी शिवशंकर लिंग ने विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस दौरान भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप प्रदान किया गया। साथ ही भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली ने भंडार कक्ष तक अवलोकन किया।

इस अवसर पर मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, दानीदाता दिनेश कानोड़िया, डोली प्रभारी किशन त्रिवेदी, वीरेश्वर भट्ट, विशेश्वर भट्ट, दिनेश पंवार, गणेश सेमवाल, प्रकाश पंवार सहित स्थानीय हक-हकूकधारी, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

anand prakash

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