बिहार के सारण में नेत्र चिकित्सा सेवाओं को मिलेगा नया आयाम, उद्योगपति गौतम अडाणी करेंगे भूमि पूजन
पटना। अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी रविवार को बिहार के सारण जिले के दौरे पर रहेंगे, जहां वे मस्तिचक गांव में आयोजित एक भूमि पूजन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और नेत्र चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह आयोजन अडाणी फाउंडेशन और अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस पहल के तहत ग्रामीण भारत में किफायती और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं के नेटवर्क को विस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान मस्तिचक गांव में “अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल अडाणी सेंटर फॉर आई डिजीज” और “अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल अडाणी ट्रेनिंग सेंटर फॉर ऑपथैल्मिक मेडिसिन” की आधारशिला रखी जाएगी। इन संस्थानों को ग्रामीण क्षेत्रों में अंधापन और दृष्टि दोष की समस्याओं के प्रभावी समाधान की दिशा में एक दीर्घकालिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इनका उद्देश्य न केवल उपचार करना है, बल्कि नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास को भी बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर गौतम अडाणी के साथ अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडाणी और अडाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अडाणी भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल की ओर से संस्थापक एवं सीईओ मृत्युंजय तिवारी, चेयरमैन (एडवाइजरी बोर्ड) रविकांत, क्लीनिकल एवं रिसर्च एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन (प्रो.) डॉ. राजवर्धन आजाद तथा मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजित कुमार पोद्दार भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
आयोजकों के अनुसार, यह पहल अडानी समूह के सामाजिक दर्शन “सेवा ही साधना है” से प्रेरित है, जिसे समूह की सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों का मूल आधार माना जाता है। इस विचार के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में कई परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है।
उल्लेखनीय है कि गौतम अडाणी का यह दौरा व्यापारिक दृष्टिकोण के साथ-साथ सामाजिक विकास और स्वास्थ्य सेवा सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह परियोजना प्रभावी रूप से लागू होती है, तो बिहार समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

