नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने भारत से 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने पर लगाई रोक
काठमांडू। नेपाल-भारत सीमा नाकों पर दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर लगाए जा रहे कस्टम शुल्क पर नेपाल उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है।उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भंसार शुल्क लगाने संबंधी वित्त मंत्रालय के निर्णय पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश जारी किया।भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपभोग के सामान लाने पर भंसार शुल्क लगाने की व्यवस्था को व्यापार संधि के प्रावधानों के खिलाफ बताते हुए अधिवक्ता अमितेश पण्डित सहित अन्य लोगों ने रिट याचिका दायर की थी।
इससे पहले वित्त मंत्रालय ने 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भंसार कर अनिवार्य करने का निर्णय लिया था। इसके बाद तराई-मधेश क्षेत्र के सीमा नाकों पर सख्ती शुरू कर दी गई थी, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था।
27 अप्रैल को दायर रिट याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सरकार को अंतरिम आदेश पर बहस के लिए बुलाया था। सरकार की ओर से दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को अदालत ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय और कस्टम विभाग के नाम अंतरिम आदेश जारी करते हुए तत्काल इस व्यवस्था पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में सरकार बनने के तुरंत बाद सीमा नाकों पर सख्ती शुरू की गई थी। सीमा पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा सामान जब्त किए जाने के फोटो और वीडियो सार्वजनिक होने के बाद व्यापक विरोध हुआ था, लेकिन सरकार अपने निर्णय से पीछे नहीं हटी थी।
नेपाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का भारत विकास परिषद, शाखा रक्सौल के अध्यक्ष रजनीश प्रियदर्शी, लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष बिमल सर्राफ, रक्सौल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव, महासचिव शंभु प्रसाद चौरसिया, टेक्सटाइल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता तथा इंडो-नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने स्वागत करते संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी एवं अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।

