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नई दिल्ली। भारत और वियतनाम के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के लिए गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह और वियतनाम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वू हाई क्वान के बीच अहम बैठक हुई।बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा, डीप-टेक, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के रिश्ते हजारों साल पुराने हैं और दोनों देश अब विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन के जरिए साझेदारी को नई ऊंचाई देना चाहते हैं। भारत ने स्टार्टअप, रिसर्च और इनोवेशन सेक्टर में मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि वियतनाम, भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। भारत-आसियान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग भविष्य में संयुक्त अनुसंधान और तकनीक आधारित विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। डॉ. सिंह ने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के स्टार्टअप्स, नवाचारकर्ताओं और शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इससे युवा उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए नई संभावनाएँ खुलेंगी। बैठक में भारत-आसियान रिसर्च एंड ट्रेनिंग फेलोशिप कार्यक्रम में वियतनाम की भागीदारी की भी सराहना की गई। अब तक वियतनाम के लगभग 10 शोधकर्ताओं ने इस फेलोशिप का लाभ उठाया है और कई संयुक्त परियोजनाएं विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में चल रही हैं।

वियतनाम के मंत्री प्रो. डॉ. वू हाई क्वान ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में बढ़ते सहयोग का स्वागत करते हुए डीप-टेक्नोलॉजी में व्यावहारिक और सामाजिक लाभ वाले सहयोग को आगे बढ़ाने में रुचि दिखाई। उन्होंने दोनों मंत्रालयों के बीच नियमित समन्वय के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का सुझाव भी दिया। दोनों पक्षों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन, साइबर सुरक्षा ढाँचे, नवाचार इकोसिस्टम और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। भारत ने इन क्षेत्रों में अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की इच्छा जताई। बैठक में शोध संस्थानों, इनोवेशन हब्स और टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन प्लेटफॉर्म्स के बीच चल रहे सहयोग की समीक्षा भी की गई। साथ ही स्टार्टअप एक्सचेंज प्रोग्राम, सह-नवाचार केंद्र और उद्योग-समर्थित अनुसंधान साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। भारत और वियतनाम ने इस बात पर सहमति जताई कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को द्विपक्षीय साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ बनाया जाएगा और भविष्य में नियमित संवाद के माध्यम से ठोस सहयोगी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

anand prakash

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