जीत के बाद बदला नहीं, बदलाव की बात होनी चाहिए : प्रधानमंत्री

जीत के बाद बदला नहीं, बदलाव की बात होनी चाहिए : प्रधानमंत्री
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उल्लेखनीय सफलता के बाद कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक है, लेकिन जीत के बाद बदले की भावना नहीं बल्कि बदलाव और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।उन्होंने इसे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताते हुए कहा कि इन चुनाव परिणामों ने दुनिया को दिखाया है कि भारत को “लोकतंत्र की जननी” क्यों कहा जाता है।

प्रधानमंत्री ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई देते हुए कहा कि “आज का दिन ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है।” उन्होंने कहा कि वर्षों की साधना जब सिद्धि में बदलती है, तो जो संतोष और खुशी मिलती है, वही आज देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं के चेहरों पर दिखाई दे रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को इस जीत का श्रेय देते हुए कहा कि “आपने कमाल कर दिया, कमल खिला दिया और नया इतिहास रच दिया।”

उन्होंने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली जीत को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि यह सिर्फ सीटों की संख्या नहीं है, बल्कि भय, हिंसा और अस्थिरता की राजनीति को जड़ से उखाड़ने का जनादेश है। उन्होंने कहा कि “बंगाल की पावन धरा पर आज एक नया सूर्य उदय हुआ है,” जो एक नए युग की शुरुआत का संकेत है और जिसका इंतजार पीढ़ियों से किया जा रहा था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावों में भारी मतदान, विशेषकर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। पश्चिम बंगाल में करीब 93 प्रतिशत मतदान को उन्होंने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में भी नए मतदान रिकॉर्ड बने हैं। उन्होंने कहा कि यह “भारत के लोकतंत्र की सबसे उजली तस्वीर” है, जहां हर वर्ग सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह दिन “विश्वास का दिन” है-भारत के लोकतंत्र में विश्वास, परफॉर्मेंस की राजनीति में विश्वास, स्थिरता के संकल्प में विश्वास और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना में विश्वास। उन्होंने पांचों राज्यों की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने विकास और सुशासन के पक्ष में अपना समर्थन दिया है।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, अस्थिरता और आर्थिक दबाव का माहौल था, तब भारत के मतदाताओं ने स्थिरता और प्रगति के लिए मतदान किया। उन्होंने इसे भारत की परिपक्व लोकतांत्रिक चेतना का उदाहरण बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने “नागरिक देवो भव” को सरकार का मार्गदर्शक सिद्धांत बताते हुए कहा कि भाजपा जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज देश के 20 से अधिक राज्यों में भाजपा-एनडीए की सरकारें हैं, जो जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां भाजपा है, वहां सुशासन और विकास है।

प्रधानमंत्री ने उपचुनावों में मिली सफलता का भी उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा में पार्टी को जनता का आशीर्वाद मिला है। उन्होंने एनडीए की नेता और महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की जीत का भी जिक्र करते हुए इसे गठबंधन की मजबूती का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि “आज केवल लोकतंत्र ही नहीं जीता है, बल्कि संविधान और संवैधानिक संस्थाएं भी जीती हैं।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र भारत के लिए सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है, जो लोगों की रगों में बहता है।

पश्चिम बंगाल के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे हिंसा के चक्र को समाप्त करें। उन्होंने कहा कि “जीत के बाद बदला नहीं, बदलाव की बात होनी चाहिए। भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान किसने किसे वोट दिया, इस मानसिकता से ऊपर उठना होगा और राज्य के विकास पर ध्यान देना होगा।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “नारी शक्ति” विकसित भारत का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को रोकने का प्रयास किया था, जिसका जवाब महिलाओं ने चुनाव में दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी महिलाओं की राजनीतिक भूमिका निर्णायक होगी।

प्रधानमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने संसद में महिला आरक्षण का विरोध किया, उन्हें आने वाले समय में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिला विरोधी राजनीति करने वाले दल अपने पापों से बच नहीं सकते।

उन्होंने केरल के संदर्भ में कहा कि वामपंथी शासन के दस वर्षों के बाद कांग्रेस को लाभ मिला है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि वहां की महिलाएं भविष्य में सही निर्णय लेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब देश में किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं बची है, जो एक बड़े वैचारिक परिवर्तन का संकेत है।

प्रधानमंत्री ने “विकसित भारत” के विजन को दोहराते हुए कहा कि यह “पूर्वोदय” की अवधारणा से जुड़ा हुआ है, जिसमें देश के पूर्वी हिस्सों-अंग, बंग और कलिंग-का विकास बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों ने भाजपा-एनडीए को समर्थन देकर विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री ने 2013 में काशी में नामांकन के दौरान कही गई बात को याद करते हुए कहा कि “मां गंगा ने मुझे बुलाया है,” और आज वह लगातार उसके आशीर्वाद को महसूस कर रहे हैं। उन्होंने गंगोत्री से गंगासागर तक भाजपा की राजनीतिक सफलता का उल्लेख करते हुए इसे व्यापक जनसमर्थन का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस जीत को जिम्मेदारी के रूप में लें और देश के विकास के लिए समर्पित रहें। उन्होंने कहा कि यह जीत सेवा, समर्पण और जनता के विश्वास का परिणाम है, जिसे और मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है।

anand prakash

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