भागलपुर का विक्रमशिला सेतु का स्लैब टूटकर गंगा में गिरा,पूर्वोतर से बिहार का आवागमन बाधित

भागलपुर का विक्रमशिला सेतु का स्लैब टूटकर गंगा में गिरा,पूर्वोतर से बिहार का आवागमन बाधित
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भागलपुर। पूर्वोत्तर राज्यों को भागलपुर से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु पर बड़ा हादसा हो गया। रविवार देर रात पुल के 133 नंबर पाये का स्लैब टूटकर गंगा नदी में गिर गया, जिससे इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।

घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और प्रशासन को तत्काल ट्रैफिक रोकना पड़ा। यह पुल भागलपुर को गंगा पार के इलाकों से जोड़ने का प्रमुख साधन है, ऐसे में इसके क्षतिग्रस्त होने से हजारों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो गई है।4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल के मेंटेनेंस को लेकर विभागीय स्तर पर मंथन चल रहा था। अधिकारियों और अभियंताओं की टीम मरम्मत पर आने वाले खर्च का आकलन कर रही थी। भागलपुर से करीब 12 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार कर मुख्यालय भेजा गया था। पथ निर्माण विभाग के वरीय अधिकारियों ने इस पर वित्त विभाग से मंतव्य और स्वीकृति मांगी थी, ताकि समय रहते मरम्मत का कार्य मानसून से पहले ही पूरी कर ली जाए, ताकि बरसात के दौरान किसी तरह की बड़ी समस्या न हो।

हाल ही में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने मुख्यालय की टीम के साथ पुल का निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मेंटेनेंस कार्य को अत्यंत आवश्यक बताते हुए जल्द प्राक्कलन भेजने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा पीरपैंती दौरे के दौरान भी उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से पुल की स्थिति पर चर्चा की थी।

उल्लेखनीय है,कि इस पुल पर 2016 में बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य कराया गया था। उस दौरान पिलरों की बियरिंग बदली गई थी और कुछ हिस्सों में कार्बन प्लेट लगाकर दरारों को ठीक किया गया था। मुंबई की एक एजेंसी को चार साल के लिए मेंटेनेंस का जिम्मा भी दिया गया था, लेकिन वर्ष 2020-21 के बाद एजेंसी ने काम बंद कर दिया। इसके बाद नियमित और समुचित रखरखाव नहीं हो सका।

पुल के महत्वपूर्ण हिस्सों जैसे बियरिंग, एक्सपेंशन ज्वाइंट, कार्बन प्लेट और संरचनात्मक मजबूती से जुड़े कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती गई। कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार के अनुसार, मरम्मत के लिए भेजे गए प्राक्कलन पर मुख्यालय स्तर से निर्णय लिया जाना था और जल्द काम शुरू करने की योजना थी। हालांकि अब 133 नंबर पाये का स्लैब ध्वस्त हो जाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। ऐसे में संभावना है कि पुल की मरम्मत के लिए नए सिरे से विस्तृत प्राक्कलन तैयार किया जाएगा।

anand prakash

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