बापूधाम मोतिहारी स्टेशन के समीप रिहायशी क्षेत्र का भू-अधिग्रहण पर हाईकोर्ट की रोक

बापूधाम मोतिहारी स्टेशन के समीप रिहायशी क्षेत्र का भू-अधिग्रहण पर हाईकोर्ट की रोक
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मोतिहारी। बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन के समीप रेल लाइन बिछाने के लिए रिहायशी क्षेत्रो का भू-अधिग्रहण करने पर पटना हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।

इसको लेकर पटना हाईकोर्ट के जस्टिस खातिम रेजा की एकल पीठ ने आदेश जारी करते हुए रेलवे व बिहार सरकार को चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।आदेश में जबाब दाखिल होने तक भू-अधिग्रहण के सभी कार्य स्थगित रखने को कहा गया है।

उल्लेखनीय है,कि रेलवे ने बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन से सटे बलुआ टाल, गोपालपुर और तरकुलवा राजस्व क्षेत्र के 125 लोगों को 3.9 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए नोटिस भेजा है। जिसको लेकर प्रभावित परिवारों ने मार्च में हाईकोर्ट में रेलवे के भू-अधिग्रहण के खिलाफ एक रिट याचिका दाखिल की।

इसकी पैरवी हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोतिहारी निवासी कुमार अमित ने की। अधिवक्ता अमित ने बताया कि इसकी सुनवाई के बाद जस्टिस खातिम रेजा की एकल पीठ ने भू-अधिग्रहण पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले में बिहार सरकार और रेलवे से जवाब मांगा है।अधिवक्ता कुमार अमित ने बताया कि रेलवे ने मुजफ्फरपुर-सुगौली रेलखंड के दोहरीकरण योजना के तहत जमीन के अधिग्रहण के लिए नोटिस भेजा है। जबकि, बापूधाम मोतिहारी में इस योजना का काम दो साल पहले ही पूरा हो चुका है।

रेलवे ने स्थानीय लोगों को गुमराह कर यहां की जमीन लेने की योजना तैयार की है। यह एक रिहायशी इलाका है। यहां तीन-चार पीढ़ी से लोग रह रहे हैं। मामले में अगले महीने हाईकोर्ट में पुन: सुनवाई होगी। अधिवक्ता ने बताया कि रेलवे के पास अपनी खाली जमीन उपलब्ध है, फिर भी रिहायशी क्षेत्र में वर्षो से घर बनाकर रह रहे लोगो की जमीन अधिग्रहण क्यों की जा रही है?

अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष सवाल उठाते हुए कहा कि बापूधाम मोतिहारी स्टेशन के उत्तर में रेलवे के पास अपना बड़ा प्लॉट मौजूद है। लाइन दोहरीकरण का कार्य भी पूरा हो चुका है। ऐसे में जमीन अधिग्रहण के लिए क्यों नोटिस भेजा गया है। कहा कि अगर रेलवे को बापूधाम मोतिहारी स्टेशन को विकसित करना है तो वह इसे उत्तरी हिस्से में भी विकसित कर सकता है। इससे बड़ी आबादी प्रभावित होने से बच जाएगी और रेलवे को भी राजस्व का नुकसान नहीं होगा।

anand prakash

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