जदयू कोटे से उपमुख्यमंत्री बनें विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, बिहार की राजनीति की अनुभवी जोड़ी

जदयू कोटे से उपमुख्यमंत्री बनें विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, बिहार की राजनीति की अनुभवी जोड़ी
Facebook WhatsApp

पटना।बिहार में नई सरकार का बुधवार को गठन हुआ। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के दो वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उप-मुख्यमंत्री पद की राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने शपथ दिलाई।बिहार की राजनीति में दोनों नेताओं की छवि एक कुशल और अनुभवी राजनेता के रूप में होती है।

नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले है विजय कुमार चौधरी

जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले विजय कुमार चौधरी सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते है। वे 2010 में समस्तीपुर जिले के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र से जीतकर मंत्री बने। 2015 में निर्विरोध बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए। 2020 में फिर से मंत्री बने। वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष, जेडीयू विधायक दल के नेता, कई महत्वपूर्व मंत्रालयों के मंत्री रहे। जिसमें वित्त, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, परिवहन, सूचना एवं जनसम्पर्क शामिल है। विजय कुमार चौधरी साफ-सुथरी छवि और कुशल प्रशासक के रूप में एक मृदुभाषी और संतुलित नेता हैं। अब उन्हें उप-मुख्यमंत्री की जिम्मेवारी सौंपी गई है।

बिहार की राजनीति में अनुभव और भरोसे का पर्याय विजेंद्र प्रसाद यादव

उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले विजेंद्र प्रसाद यादव बिहार की राजनीति में एक ऐसा नाम है, जो अनुभव और भरोसे का पर्याय बन चुके हैं। सुपौल की धरती से निकलकर उन्होंने न केवल अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की।

1990 में पहली बार विधायक बनने के बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजनीतिक उतार-चढ़ाव, दलों के विभाजन और बदलते गठबंधनों के बीच भी उन्होंने अपने सिद्धांतों और जनसेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने सिंचाई, ऊर्जा, वित्त, वाणिज्य कर जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने विकास की कई महत्वपूर्ण पहल कीं। खासकर ऊर्जा क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। नीतीश कुमार के साथ लंबे समय तक काम करते हुए उन्होंने सरकार में अपनी उपयोगिता साबित की।

लगातार 36 वर्षों तक सत्ता के शीर्ष पर बने रहना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होता, लेकिन विजेंद्र प्रसाद यादव ने इसे अपनी निष्ठा और जनसेवा के जरिए संभव बनाया। सुपौल की जनता के साथ उनका गहरा जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है।

अब जब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है, तो यह उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और विश्वास का ही परिणाम है।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page