समाचार एजेंसी यूएनआई के मुख्यालय से पत्रकारों-कर्मचारियों को पुलिस ने बलपूर्वक बाहर निकाला,परिसर सील

समाचार एजेंसी यूएनआई के मुख्यालय से पत्रकारों-कर्मचारियों को पुलिस ने बलपूर्वक बाहर निकाला,परिसर सील
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नई दिल्ली। देश के समाचार जगत में शुक्रवार देर शाम एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के परिसर को दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के सैकड़ों जवानों के साथ पत्रकारों कर्मचारियों पर बल प्रयोग करके खाली करा लिया गया।पिछले कई दशकों से संसद मार्ग से लगे 09 रफी मार्ग पर स्थित परिसर से यूएनआई का संचालन हो रहा था। दिल्ली उच्च न्यायालय में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा आवंटन रद्द होने के बाद लंबित याचिका पर आज शाम फैसला आने के बाद कुछ घंटों बाद आनन फानन में कुछ सरकारी अधिकारी बिना किसी पूर्व नोटिस के दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 300 जवानों एवं अफसरों और कुछ वकीलों के साथ परिसर में घुस आये और वहां कार्यरत पत्रकारों एवं अन्य कर्मचारियों से तुरंत न्यूजरूम खाली कर परिसर से बाहर जाने का दबाव डालने लगे। जबकि उस समय खबरें प्रेषित करने का काम सबसे ज्यादा था।

उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश से की जा रही है, लेकिन वे कोई लिखित आदेश नहीं दिखा सके। उन्होंने कठोर शब्दों में कहा कि यदि कर्मचारी आराम से बाहर नहीं निकलते हैं तो उन्हें बल प्रयोग करना पड़ेगा।

उस समय तक कर्मचारियों को दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले की जानकारी नहीं हो पाई थी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में जमीन आवंटन रद्द करने के शहरी विकास विभाग के भूमि विकास कार्यालय के निर्णय को उचित ठहराया है।

कर्मचारियों के कुछ समय देने और कंपनी प्रबंधन के आने का इंतजार करने के अनुरोध तथा नोटिस दिखाने की मांग पर उन्होंने महिला कर्मचारियों सहित कुछ कर्मचारियों को जबरन घसीटकर और धक्का देकर उनकी सीटों से हटाया और न्यूजरूम से बाहर निकाला। इस दौरान उनके साथ गाली-गलौच भी किया गया।

पुलिस अमले ने परिसर के गेट पर कब्जा कर लिया और खबरों के सिलसिले में बाहर गये पत्रकारों और प्रबंधन के अधिकारियों को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। वे अपने व्यक्तिगत सामान भी नहीं ले पाये।

इस परिसर को अचानक खाली कराये जाने से यूएनआई की अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू सेवा के करीब 500 से भी अधिक सब्सक्राइबरों को खबरों का प्रेषण अचानक रुक गया। इससे ऐतिहासिक संवाद समिति के अस्तित्व और सैकड़ों कर्मचारियों तथा उनके परिवारों के भविष्य पर भी तलवार लटक गयी है।

anand prakash

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