डिप्टी सीएम ने राजस्व अधिकारियो की हड़ताल को बताया अवैध, हड़ताली अधिकारियो से सरकारी सामान वापस लेने का आदेश
पटना। बिहार राजस्व सेवा संघ की हड़ताल सोमवार से फिर शुरू हो गई। इसके कारण अंचलों में कामकाज ठप है।राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल 11 फरवरी से ही चल रही है। राजस्व कर्मचारी और अंचल एवं राजस्व अधिकारी ही प्राथमिक स्तर पर राजस्व एवं भूमि सुधार का काम देखते हैं।संघ ने यह निर्णय पिछली हड़ताल के दौरान किए गए समझौते को अबतक लागू न करने के विरोध में लिया है। संघ की मुख्य मांग है कि उसके संवर्ग के अधिकारियों को डीसीएलआर के पद पर तैनात किया जाए।
अभी यह पद बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पास है। पिछले महीने की समझौता वार्ता में संघ की यह मांग मान ली गई थी।
दूसरी तरफ उप मुख्यमंत्री सह भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताली अधिकारियों को काम पर न लौटने की हालत में सेवा से बर्खास्त करने की धमकी दी है।
संघ ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। राजस्व सेवा के अधिकारी ही अंचल अधिकारी एवं राजस्व अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
उनके हड़ताल पर जाने के कारण सभी 537 अंचलों में दाखिल खारिज, परिमार्जन, जाति, आवास और आय प्रमाण पत्र बनाने जैसी सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं।
भू लगान वसूली का यह अंतिम महीना चल रहा है। हड़ताल में राजस्व सेवा के दोनों संघ- बिरसा और बिरसा यूनाइटेड के सदस्य शामिल हैं।
इसका असर चकबंदी और फार्मर रजिस्ट्रेशन के काम पर भी पड़ा है। हड़ताल लंबी चली तो जनगणना 2027 भी प्रभावित हो सकता है। क्योंकि राजस्व एवं भूमि सुधार ही राज्य में जनगणना का नोडल विभाग है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ग्रामीण विकास पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी को अंचलाधिकारी तथा राजस्व अधिकारी का प्रभार देने का निर्णय लिया है।
विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज ने जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर कहा है कि वे चाहें तो अपने स्तर पर भी वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं।
हड़ताली अधिकारियों से वाहन, डोंगल एवं लैपटॉप, कार्यालय की अलमीरा एवं बक्से में संधारित राजस्व अभिलेखों की चाभी वापस लेने का भी निर्देश दिया गया है।

