नेपाल में मतगणना जारी,देखे अब तक की दलगत स्थिति

नेपाल में मतगणना जारी,देखे अब तक की दलगत स्थिति
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काठमांडू। नेपाल में हाल ही में हुए प्रतिनिधि सभा चुनावों की मतगणना के साथ ही देश की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। चुनाव के शुरुआती और मध्य चरण के परिणामों में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी भारी बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।पारंपरिक राजनीतिक दलों-जैसे नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और माओवादी पार्टी जिसका नाम नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी है, को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है।

यह खबर लिखे जाने तक प्रतिनिधि सभा में 165 में से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 72 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि वह अभी भी 49 सीटों पर अग्रता बनाए हुए है। यानि आरएसपी के खाते में कुल 121 सीटें आने की संभावना है।

इसी तरह नेपाली कांग्रेस 10 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और 11 सीटों पर अभी भी आगे है। दूसरे स्थान पर रहने वाली इस पार्टी को 21 सीटें मिलने की संभावना है। इस पार्टी के अध्यक्ष गगन थापा सहित अधिकांश बड़े नेता भी चुनाव हार गए हैं।

केपी ओली के नेतृत्व में रही यूएमएल को अब तक सिर्फ 3 सीटों पर जीत मिली है, जबकि वह 8 सीटों पर आगे है। हालांकि इन सभी सीटों में से अधिकांश पर बहुत ही कम वोट से आगे है। ओली 50 हजार के अंतर से चुनाव हार गए हैं, जबकि पार्टी के 11 पदाधिकारी और उनकी सरकार में शामिल सभी मंत्री भी चुनाव हार गए हैं।

पुष्पकमल दहाल के नेतृत्व में रहे नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को भी 3 सीटों पर ही जीत मिली है, जबकि वह 4 सीटों पर आगे है। माओवादी पार्टी के उदय के बाद यह इस पार्टी की सबसे करारी हार है। हालांकि इस पार्टी के अध्यक्ष प्रचण्ड चुनाव जीत गए हैं। लेकिन उनकी बेटी रेणु दहाल जो भरतपुर की मेयर थी वह भी बुरी तरह से चुनाव हार गई हैं।

नेपाल के चुनाव में राजा के समर्थक मानी जाने वाली पार्टी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली है। पार्टी के युवा नेता ज्ञानेन्द्र शाही अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे बाकी सभी बड़े दिग्गज नेता और पार्टी अध्यक्ष राजेन्द्र लिंगडेन भी चुनाव हार गए हैं।

इसके अलावा एक स्वतंत्र उम्मीदवार महावीर पुन की जीत हुई है। रामन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पुन सुशीला सरकार में मंत्री भी रहे। मंत्री पर से इस्तीफा देकर चुनाव लड़े महावीर पुन को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का समर्थन प्राप्त था।

इस चुनाव में पहली बार हिस्सा ले रहे श्रम संस्कृति पार्टी भी तीन सीटों पर आगे है। इस पार्टी के खाते में अब तक एक भी सीट नहीं आई है। इस चुनाव से मधेशी दलों का सुपड़ा साफ हो गया है। इस पार्टी के एक भी नेता चुनाव नहीं जीत पाए।

anand prakash

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