प्रसाद रत्नेश्वर को मिला बिहार सरकार का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान

प्रसाद रत्नेश्वर को मिला बिहार सरकार का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान
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प्रदर्श कला के लिए एक लाख रुपये , प्रतीक चिह्न, मोमेंटो, प्रमाण पत्र एवं अंगवस्त्रम से हुए सम्मानित

मोतिहारी। बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा बुधवार को पटना के मौर्या अशोक हॉल में मोतिहारी निवासी प्रसिध्द रंगकर्मी – नाटककार प्रसाद रत्नेश्वर को प्रदर्श कला का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान 2024 -25 प्रदान गया।

बिहार सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर के राज्य एवं राज्य के बाहर के नामचीन कलाकार को दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान प्रसाद रत्नेश्वर को ‘ प्रदर्श कला के लिए (राष्ट्रीय स्तर ) राष्ट्रीय सम्मान ‘ पुरस्कार दिया गया। बिहार कला पुरस्कार के अन्तर्गत दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा सम्मान है।
सम्मान के रूप में प्रसाद रत्नेश्वर को एक लाख रुपये के साथ स्मृति चिह्न, मोमेंटो, प्रमाण -पत्र, अंगवस्त्र आदि प्रदान किया गया।

इस मौके पर प्रसाद रत्नेश्वर के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर किये गये उल्लेखनीय योगदान से सम्बंधित एक परिचयात्मक फ़िल्म भी दिखायी गयी जिसे विभागीय मीडिया टीम ने तैयार किया है।
बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा मुख्य अतिथि ने इस समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाटन किया। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मोतीलाल प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह के मंच पर विशिष्ट अतिथि विभाग के सचिव प्रणव कुमार , संयुक्त सचिव सह सांस्कृतिक कार्य निदेशक श्रीमती रूबी समेत अनेक उच्चाधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है,कि दिल्ली में बिहार महोत्सव एवं संयुक्त चम्पारण में चम्पारण महोत्सव के प्रणेता प्रसाद रत्नेश्वर पिछले 41 वर्षों से मोतिहारी,पटना एवं दिल्ली रंगमंच पर सक्रिय है। वे 14 वर्षों तक राज्य सरकार की बिहार संगीत नाटक अकादमी की कार्यसमिति के सदस्य तथा दो वर्षों तक एक कलाविद सदस्य के रूप में इज़ेडसीसी , संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।

नाटक के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त प्रसाद रत्नेश्वर का नाटक ‘ निलही कोठी ‘ विदेसिया लोक नाट्य शैली का नाटक है जिसका राष्ट्रीय स्तर पर मंचन हो चुका है। इसके अलावा इनकी कविता, ग़ज़ल, शोध प्रबंध, शोध- पत्र संग्रह एवं जीवनी की पाँच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
थारु जनजाति को विश्व की एक नई सभ्यता के रूप में चीन के विश्व मंच पर प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके प्रसाद रत्नेश्वर ने बताया कि
इस सम्मान का स्थानीय महत्व यह है कि 150 वर्षो के चम्पारण रंगमंच के इतिहास में कई पीढ़ियों के गुजर जाने के बावजूद यहाँ के किसी रंगकर्मी को किसी स्तर का कोई राजकीय सम्मान प्राप्त नहीं हुआ था। इस राष्ट्रीय सम्मान के साथ यहाँ के रंगमंच पर एक नया इतिहास बन गया है। उन्होंने कहा कि मोतिहारी रंगमंच पर अपनी भूमिका कर गुज़र चुके हज़ारों रंगकर्मियों के लिए यह सम्मान तर्पण के समान है।
उल्लेखनीय है कि यह प्रतिष्ठित सम्मान शोभना नारायण, पं. बिरजू महाराज, प्रेम कुमार मल्लिक, सतीश आनंद को दिया जा चुका है।

anand prakash

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