मानेकशॉ सेंटर में शुरू हुआ तीनों सेनाओं के लिए तीसरा फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स
नई दिल्ली। तीनों सेनाओं के लिए तीसरा फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स सोमवार से मानेकशॉ सेंटर में शुरू हुआ, जो 25 फरवरी तक चलेगा।एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय के तत्वावधान में और संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र (सीईएनजेओडब्ल्यूएस) के सहयोग से संचालित इस कोर्स में विशिष्ट विषयों का अध्ययन कराया जायेगा। साथ ही सैन्य अभियानों में क्षेत्र विशिष्ट पर आधारित युद्धक क्षेत्र के बदलाव को भी इस कोर्स में शामिल किया गया है।
सेना के अनुसार यह कोर्स इस बात की गहन समझ विकसित करने पर केंद्रित है कि प्रौद्योगिकी युद्ध संचालन को कैसे प्रभावित कर रही है। इसके लिए हमारी सोच, अवधारणाओं, सिद्धांतों, रणनीतियों और युद्ध रणनीति पर पुनर्विचार करना आवश्यक है। इसमें महत्वपूर्ण विषयों का गहन अध्ययन, उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन और रक्षा बलों की क्षमताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थानों का दौरा भी शामिल है। इस कोर्स में तीनों सेनाओं के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप, एमएसएमई, डीपीएसयू और निजी उद्योगों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। सेना के प्रतिभागियों मेंमेजर से लेकर मेजर जनरल और उनके समकक्ष तकऔर कनिष्ठ अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता और विशेषज्ञता का योगदानदेंगे। वरिष्ठ अधिकारी अपने संचालन अनुभव और रणनीतिक ज्ञान को साझा करेंगे।
बताया गया है कि फ्यूचर वॉरफेयर संबंधी कोर्स सशस्त्र बलों की संचालन से जुड़ी प्राथमिकताओं को रक्षा क्षेत्र के स्वदेशी उद्योग की क्षमताओं के साथ तालमेल बिठाएगा और आधुनिक एवं भविष्य के युद्ध के विभिन्न पहलुओं पर मुक्त चर्चा को सार्थक बनाएगा। पूर्वसैनिकों, सेवारत अधिकारियों, पूर्व-राजदूतों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों और अकादमिक पेशेवरों सहित विविध प्रकार के विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का समग्र विश्लेषण गहन और पेशेवर तरीके से किया जाए।
इसके अलावा इस कोर्स में महत्वपूर्ण और रेयर अर्थ एलिमेंट, आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों और भविष्य में होने वाले अभियानों को प्रभावित करने वाली क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीति जैसे विषयों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इससे भविष्य में अभियानों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए रक्षा बलों द्वारा अध्ययन और विश्लेषण किए जाने वाले विषयों की संख्या में विस्तार होगा। सितंबर 2024 में आयोजित प्रथम कोर्स की सफलता को आगे बढ़ाते हुए इस विस्तारित तीन-सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान के उस दृष्टिकोण को साकार करना है, जिसके तहत अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।

