ठंड का प्रकोप, वाहनों की रफ्तार हुई धीमी,सब्जी और तेलहन फसलो पर पड़ रहा बुरा प्रभाव
पूर्वी चंपारण। जिला पिछले कई दिनों से घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में है। लगातार धूंध के कारण सूरज के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं, जिससे पूरा इलाका भीषण ठंड की गिरफ्त में है। इस स्थिति ने आम जनजीवन, यातायात और खेती-किसानी को बुरी तरह प्रभावित किया है। शून्य के करीब दृश्यता के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है।लंबी दूरी की ट्रेन और बस अपने निर्धारित समय से कई घंटे की देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। कोहरे और ठंड का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर भी पड़ा है। बाजारों में सन्नाटा पसरा है और दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हो रही है। किसानों के लिए यह मौसम संकट लेकर आया है।
कोहरे और नमी के कारण आलू और टमाटर की फसलों में झुलसा रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। इसके अलावा, सरसों और दलहन की फसलों पर भी पाले का खतरा मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि धूप न निकलने से पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। पशुपालकों को भी कनकनी के कारण चारा लाने और मवेशियों को ठंड से बचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ठंड से बचने के लिए लोग अब पूरी तरह अलाव पर निर्भर हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग चौपालों पर आग तापकर खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं। बढ़ती ठंड के कारण बच्चों और बुजुर्गों में सर्दी-खांसी और सांस की तकलीफ बढ़ गई है। इसके चलते अस्पतालों में मरीजों की भीड़ देखी जा रही है।
रणधीर की रिपोर्ट

