मोतीझील के पुनरुद्धार पर हाईकोर्ट सख्त, छह माह में काम पूरा करने का आदेश
-मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से निगरानी कराकर 31 मार्च 2027 तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
मोतिहारी। ऐतिहासिक मोतीझील के संरक्षण, पुनरुद्धार, सौंदर्यीकरण तथा उसके आसपास सहित जलस्रोतों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के मामले में पटना उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अधिवक्ता कुमार अमित द्वारा दायर अवमानना वाद में न्यायालय ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे मोतीझील की गाद की सफाई (डिसिल्टिंग), ड्रेजिंग, शेष अतिक्रमण हटाने तथा पूरे क्षेत्र के सौंदर्यीकरण से संबंधित सभी कार्यों को अगले छह माह के भीतर पूरा कराना सुनिश्चित करें।
माननीय न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह एवं न्यायमूर्ति सौरेन्द्र पांडेय की खंडपीठ ने 1 अक्टूबर 2026 को मिसलेनियस जूरिडिक्शन केस नं 3862/ 2024, जो सिविल राइट जूरिडिक्शन केस नंबर 3876/ 2022 से संबंधित है। मामले में उक्त आदेश पारित किया है। न्यायालय ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव को 31 मार्च 2027 तक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष अनुपालन की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता कुमार अमित को यह स्वतंत्रता सुरक्षित रखी है कि यदि बिहार सरकार के मुख्य सचिव द्वारा न्यायालय के समक्ष दिए गए आश्वासन का निर्धारित छह माह की अवधि में अक्षरशः अनुरूप पालन नहीं किया जाता है, तो वे नई अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं। इस प्रकार, न्यायालय ने केवल सरकारी आश्वासन को अभिलेख पर लेकर मामला समाप्त नहीं किया, बल्कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों को पूरा कराने तथा अनुपालन की स्थिति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की व्यवस्था भी की है। न्यायालय ने वर्तमान अवमानना याचिका का निस्तारण करते हुए उपर्युक्त निर्देश पारित किए।
मामले की पृष्ठभूमि में उच्च न्यायालय के 5 मई 2023 के आदेश का विशेष महत्व है। मूल रिट याचिका में न्यायालय ने मोतीझील के पुनरुद्धार से संबंधित चार प्रमुख मुद्दों पर ध्यान आकृष्ट किया था। इनमें मोतीझील में गाद की सफाई एवं ड्रेजिंग का अधूरा कार्य पूरा करने, आसपास किए गए अतिक्रमण को हटाने, झील के तटबंध, पार्क तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास, वृक्षारोपण सहित संपूर्ण परिसर का सौंदर्यीकरण सहित मोतीझील के मुख्य जल पुनर्भरण स्रोत रत्नागिरि चैनल से अतिक्रमण हटाने का मामला शामिल है।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने पूर्व के आदेश में पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन को अभिलेख पर लेते हुए उसके अनुपालन की अपेक्षा की थी। साथ ही, बिहार सरकार के मुख्य सचिव को अधिकृत अधिकारी के माध्यम से मोतीझील के पुनरुद्धार कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी सुनिश्चित करने और प्रत्येक तीन महीने पर समीक्षा रिपोर्ट प्राप्त करने का निर्देश दिया गया था। लिहाजा उक्त निर्देशों के अनुपालन में कथित चूक को लेकर वर्तमान अवमानना वाद दायर किया गया था।
मुख्य सचिव के शपथपत्र में सामने आई कार्यों की अद्यतन स्थिति
उच्च न्यायालय के 21 अगस्त 2026 के आदेश के बाद बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने 18 सितंबर 2026 को विस्तृत शपथपत्र एवं स्थिति रिपोर्ट दाखिल की। इसमें 2 सितंबर 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों तथा विभिन्न कार्यों की प्रगति का विवरण दिया गया। शपथपत्र के अनुसार, मोतीझील के आसपास कुल 158 अतिक्रमणों की पहचान की गई थी, जिनमें से 138 को अतिक्रमणमुक्त कराया जा चुका था। शेष 20 स्थानों में 16 सरकारी भवनों तथा चार गैर-सरकारी भवनों से संबंधित मामले न्यायालय में लंबित होने के कारण उन्हें अतिक्रमणमुक्त नहीं कराया जा सका था।
रत्नागिरि चैनल के संबंध में रिपोर्ट में बताया गया कि चैनल के 20 स्थानों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। पूर्व की रिपोर्ट में भी चैनल के अतिक्रमण हटाने को मोतीझील के जलस्रोत के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए आवश्यक बताया गया था। मुख्य सचिव के शपथपत्र में प्रस्तुत प्रगति विवरण के अनुसार, मोतीझील में खरपतवार हटाने का कार्य पूरा हो चुका था, जबकि गाद की सफाई का कार्य 70 प्रतिशत पूरा हुआ था। मुख्य सचिव ने शेष 30 प्रतिशत डिसिल्टिंग कार्य को 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश संबंधित कार्यकारी एजेंसी एवं बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक को दिया था।
आधारभूत संरचनाओं की स्थिति भी मोतीझील के पुनरुद्धार पर हाईकोर्ट सख्त, छह माह में काम पूरा करने का आदेशसंतोषजनक रूप से पूर्ण नहीं थी। रिपोर्ट में स्नान घाट का कार्य 40 प्रतिशत, शौचालय ब्लॉक का कार्य 50 प्रतिशत, चेंजिंग रूम का कार्य 40 प्रतिशत तथा तटबंधों के सुधार का कार्य 22 प्रतिशत पूरा बताया गया। वहीं, पार्कों के विकास और पाथवे का निर्माण उस समय तक नहीं हुआ था। वृक्षारोपण, बैठने के लिए बेंच लगाने तथा कूड़ेदान स्थापित करने का कार्य भी लंबित बताया गया था। इन स्थितियों को देखते हुए शेष सौंदर्यीकरण कार्यों के लिए संशोधित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने तथा सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त कर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया। जबकि 2 सितंबर 2026 की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने मोतीझील के सौंदर्यीकरण के शेष कार्यों के लिए संशोधित डीपीआर तैयार करने तथा तटबंधों के सुधार, पार्कों के विकास, वृक्षारोपण, बेंच और कूड़ेदान की व्यवस्था सहित लंबित कार्यों को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसके अतिरिक्त, रत्नागिरि चैनल के उन हिस्सों में, जहां से अतिक्रमण हटाया जा चुका है, विकास कार्य कराने के लिए डीपीआर एवं अनुमान तैयार करने तथा संबंधित कार्यों को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश भी दिया गया था।
सरकारी भवनों और गैर-सरकारी भवनों के शेष अतिक्रमण के मामलों की अलग-अलग समीक्षा कर अगली बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को सौंपी गई थी। वहीं मुख्य सचिव के शपथपत्र में 8 जुलाई 2026 और 31 जुलाई 2026 को आयोजित समीक्षा बैठकों का विवरण भी शामिल था। इन बैठकों में मोतीझील के सौंदर्यीकरण एवं पुनरुद्धार कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने, परियोजना की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने तथा अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। 31 जुलाई 2026 की बैठक में डिसिल्टिंग मशीन एवं अन्य उपकरणों के संचालन और रखरखाव के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने, लंबित कार्यों तथा ठेके से संबंधित मामलों की समीक्षा करने और शेष कार्यों के लिए नई DPR तैयार कर निविदा की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया था।
इसके अतिरिक्त, परियोजना के प्रबंधन में कथित देरी, लापरवाही एवं ठेके के प्रबंधन से संबंधित विषय पर परियोजना निदेशक के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया था। उक्त बैठक में मोतीझील के सौंदर्यीकरण एवं पुनरुद्धार का कार्य पूरा होने तक पक्की सड़क के निर्माण पर रोक रखने तथा सड़क निर्माण के संबंध में बाद में निर्णय लेने का निर्देश भी दर्ज है। फिलहाल उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 के अपने आदेश में मुख्य सचिव को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि वे मोतीझील के जलाशय की गाद की सफाई एवं ड्रेजिंग, शेष अतिक्रमण हटाने, रत्नागिरि नहर और तटबंधों से अतिक्रमण हटाने तथा पूरे क्षेत्र में वृक्षारोपण, बेंच, कूड़ेदान एवं अन्य सौंदर्यीकरण कार्यों को छह माह के भीतर पूरा कराना सुनिश्चित करें। न्यायालय ने मुख्य सचिव को 31 मार्च 2027 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसे न्यायालय के कक्ष में अवलोकन के लिए प्रस्तुत किया जा सके। उक्त जानकारी याचिकाकर्ता कुमार अमित, अधिवक्ता ने दी है।

