मेहसी में उर्स-ए-मुक़द्दस व सरकार-ए-मेहसी कॉन्फ्रेंस में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम

मेहसी में उर्स-ए-मुक़द्दस व सरकार-ए-मेहसी कॉन्फ्रेंस में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम
Facebook WhatsApp

रिदा-ए-क़िरअत से नवाजी गईं छात्राएं, उलमा की तकरीर और शोअरा के नातिया कलाम से गुलजार हुई महफिल

मेहसी। मेहसी स्थित दरगाह शरीफ़ में 24 अक्टूबर को उर्स-ए-मुक़द्दस व सरकार-ए-मेहसी कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन हुआ। जश्न-ए-रिदा-ए-क़िरअत एवं जश्न-ए-दस्तार-ए-हुफ़्फ़ाज़-ए-किराम से सजी इस रूहानी महफिल में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से उलमा-ए-किराम, मशाइख़, शोअरा और बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।

कार्यक्रम हाफ़िज़-ओ-क़ारी सैयद नूरानी रज़ा हलीमी अशरफ़ी की सरपरस्ती में आयोजित हुआ। सदारत अल्लामा मौलाना सैयद नूर मियां हलीमी ने की, जबकि सैयद शमीम अहमद की क़यादत में कार्यक्रम संपन्न हुआ।

कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सैयद नूर मियां हलीमी ने कहा कि आज समाज नबी-ए-करीम की तालीमात से दूर होता जा रहा है। नई पीढ़ी को कुरआन, इल्म और पैगंबर-ए-इस्लाम की तालीमात से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इल्म ही समाज को बेहतर दिशा दे सकता है।

किछौछा शरीफ़ के सैयद जामी मियां अशरफ़ी, कोलकाता के इज़हार अशरफ़ और मुंबई के सुल्तान रज़ा समेत कई प्रमुख उलमा ने भी खिताब किया।

वहीं नातिया महफिल में आज़म इक़बाल रामपुरी, संजर कलकत्तावी, तौक़ीर इलाहाबादी, जमशेद साहिल बरेलवी, महबूब आलम शबनम चंपारनी और वसीम अख्तर मज़हरी सहित कई शोअरा ने अपने कलाम से समां बांध दिया।

आयोजन का विशेष आकर्षण जामिया बीबी शाह-ए-मदीना लिलबनात की छात्राओं का जश्न-ए-रिदा-ए-क़िरअत रहा। कुरआन-ए-पाक की तिलावत और दीनी तालीम हासिल करने वाली छात्राओं को रिदा-ए-क़िरअत से नवाजा गया। उलमा की तकरीर, नातिया कलाम और इल्म के पैगाम के बीच पूरी महफिल रूहानी रंग में सराबोर रही।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page