एमजीसीयू के अंग्रेजी विभाग ने मानविकी लोककथा अध्ययन पर व्याख्यान का किया आयोजन

एमजीसीयू के अंग्रेजी विभाग ने मानविकी लोककथा अध्ययन पर व्याख्यान का किया आयोजन
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पूर्वी चंपारण।महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग द्वारा मंगलवार को “मानविकी में लोककथा अध्ययन” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमे मुख्य वक्ता प्रोफेसर देवेंद्र कुमार, अंग्रेज़ी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) थे।

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. विमलेश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, अंग्रेज़ी विभाग ने प्रो. कुमार का मोमेंटो भेंट कर स्वागत किया, जबकि डॉ. अंजनी श्रीवास्तव ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। व्याख्यान में प्रो. देवेंद्र कुमार ने लोककथा अध्ययन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने लोकसंग्रह के इतिहास का विवरण प्रस्तुत किया और बताया कि यूनेस्को द्वारा लोकसंस्कृति को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी गई है। प्रो. कुमार ने लोककथाओं और लोकगीतों के संग्रह, रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़ीकरण से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शोधकर्ताओं के पास ऐसे तकनीकी साधन हैं जिनसे लोककथाओं और लोकगीतों का संकलन पहले की तुलना में बहुत सरल हो गया है, लेकिन इस लोक धरोहर को सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने हरियाणवी महिलाओं से एकत्र किए गए लोकगीतों का उल्लेख किया और बताया कि बिहार की लोकसंस्कृति अत्यंत समृद्ध है, जो शोधार्थियों के लिए अमूल्य संसाधन सिद्ध हो सकती है।

व्याख्यान के अंत में प्रो. कुमार ने अपने संग्रह में से एक हरियाणवी लोकगीत के कुछ पद स्वयं गाकर सुनाए, जिससे वातावरण सरस और जीवंत हो उठा। व्याख्यान के पश्चात श्रोताओं ने मौलिकता, अनुवाद और सौंदर्यशास्त्र जैसे विषयों पर उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिससे एक सार्थक चर्चा हुई। इस अवसर पर डॉ. उमेश पात्रा, डॉ. कल्याणी हज़री, डॉ. चंदोबा, डॉ. दीपक सहित विभाग के अन्य शिक्षकगण और छात्र उपस्थित रहे। उक्त कार्यक्रम विभाग के विशिष्ट व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित एक सफल एवं ज्ञानवर्धक सत्र सिद्ध हुआ।

anand prakash

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