भागलपुर में फिर गहराया बाढ़ का संकट: खतरे के निशान के पार पहुंची गंगा, टीएमबीयू सहित शहर के कई इलाके जलमग्न

भागलपुर में फिर गहराया बाढ़ का संकट: खतरे के निशान के पार पहुंची गंगा, टीएमबीयू सहित शहर के कई इलाके जलमग्न
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भागलपुर। जिले में गंगा नदी के जलस्तर में दोबारा हुई भारी वृद्धि ने एक बार फिर तबाही मचानी शुरू कर दी है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ अब शहरी क्षेत्रों में भी तेजी से पानी प्रवेश कर रहा है।

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर एक बार फिर पूरी तरह से झील में तब्दील हो चुका है। विश्वविद्यालय के लालबाग प्रोफेसर कॉलोनी और पीजी गर्ल्स हॉस्टल में दोबारा बाढ़ का पानी घुसने से हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय परिसर के अलावा शहर के कई निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक भवन, सीनेट हॉल, मारवाड़ी कॉलेज हॉस्टल रोड, सिटी कॉलेज और पीएनए साइंस कॉलेज के रास्ते पूरी तरह डूब चुके हैं।

मुख्य सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी जमा है। नाथनगर और चंपानगर इलाकों के निचले मुहल्लों और बुनकर बहुल बस्तियों में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक प्रवेश कर चुका है। बरारी और मायागंज के तटीय रिहायशी इलाकों के साथ-साथ कई मुख्य संपर्क मार्गों पर पानी फैल गया है।एनएच-80 (भागलपुर-कहलगांव मार्ग) और सुल्तानगंज के शहरी इलाकों से सटे हिस्सों में भी पानी का दबाव बढ़ गया है। पानी बढ़ने से यूनिवर्सिटी परिसर में नाव चलने की नौबत आ गई है। प्रशासनिक और परीक्षा भवनों के ग्राउंड फ्लोर में पानी भरने से छात्रों के प्रमाण पत्र वितरण और आवश्यक आधिकारिक कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।

पीजी गर्ल्स हॉस्टल और अन्य छात्र आवासों में पानी भरने से बिजली और पेयजल की भारी किल्लत हो गई है। जलजमाव के कारण छात्राएं हॉस्टल छोड़कर अपने घर लौटने को मजबूर हैं, वहीं जो छात्र फंसे हैं वे खुद को कमरों में कैदी जैसा महसूस कर रहे हैं। बाढ़ के पानी के साथ प्रोफेसर कॉलोनी और हॉस्टलों में खतरनाक सांप (जैसे कोबरा), बिच्छू और अन्य विषैले कीड़े-मकोड़े घुस रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और छात्रों में भारी दहशत है। सड़कों पर घुटने से लेकर कमर तक पानी होने के कारण लोगों को आने-जाने के लिए असुरक्षित नावों, ठेलों या प्रदूषित पानी में तैरकर जाना पड़ रहा है।

जमा हुए बाढ़ के गंदे पानी से बदबू आने लगी है, जिससे जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों (जैसे डेंगू, मलेरिया, डायरिया) के फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है।विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय नगर निगम से प्रभावित इलाकों में पानी निकालने के लिए पंप लगाने और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव की मांग की जा रही है। यदि गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी इसी तरह जारी रही, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

anand prakash

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