खुद पर भरोसा रखकर आगे बढ़ना ही संभलने का असली भाव है:राम बहादुर राय
नई दिल्ली। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने गुरुवार को कहा कि असफलता से निराश होने के बजाय खुद पर भरोसा रखकर आगे बढ़ना ही संभलने का असली भाव है।राम बहादुर राय आज दिल्ली स्थित आईजीएनसीए में पुस्तक ‘नव-चिंतन: विचार से अनुभूति तक…’ के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस पुस्तक के लेखक प्रवीण के. शुक्ल हैं और इसे प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गयी है।
उन्होंने कहा, यह पुस्तक युवाओं और नई पीढ़ी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। इसमें न केवल विचार और जीवन संदेश हैं, बल्कि आधुनिक पीढ़ी के लिए ‘टेड-एक्स’ शैली का एक अनूठा तड़का और ‘मेटा इकोनॉमिक्स’ जैसे आधुनिक विषयों का भी समावेश है।
पुस्तक में दिए गए दो मुख्य शब्दों अवस्था और व्यवस्था पर चर्चा करते हुए राय ने कहा कि परिस्थितियों को बदलने के लिए रोने-धोने के बजाय व्यवस्था में बदलाव लाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद अपनाई गई विकास की अंधी दौड़ और औद्योगिक घरानों के पक्ष में बनी नीतियों के कारण आज पर्यावरण असंतुलन, प्रदूषण और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्रकृति के सिद्धांतों के अनुसार संसाधनों का सही उपयोग ही इसका समाधान है।पुस्तक की व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए राय ने सुझाव दिया कि इसे ‘हिंद पॉकेट बुक्स’ के पॉकेट साइज़ और किफायती कागज़ पर प्रकाशित किया जाना चाहिए। यह पुस्तक समाज में एक नया वैचारिक आंदोलन पैदा कर सकती है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में ले. ज. वी के चतुर्वेदी ने कहा कि विचार और भाव हमें पूर्वजों, माता-पिता और वातावरण से मिलते हैं। सादा जीवन, उच्च विचार ही जीवन की सफल यात्रा का आधार है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता कपड़ों या लहजे से नहीं, बल्कि ज्ञान और विवेक से आती है। तकनीक और ज्ञान में वैश्विक स्तर पर सक्षम बनें लेकिन अपनी भाषा, खान-पान, रीति-रिवाज और संस्कृति पर गर्व करें।
प्रवीण के. शुक्ल ने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य लोगों के अंतर्मन को छूना और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। यह पाठकों को सफलता के मार्ग, सामाजिक उत्तरदायित्व और आध्यात्मिक चेतना को गहराई से समझने में मदद करती है।
राज्यसभा सांसद एवम उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की ओर से साझा एक वीडियो में कहा कि जीवन को केवल उपलब्धियों तक सीमित न रखकर उसे सार्थक बनाना चाहिए। आज के युग में जहाँ गति से निजता का आयाम खो दिया है, वहाँ ठहराव, आत्ममंथन और सतत चिंतन की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। मेरा मानना है कि ‘नव-चिंतन’ का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ पाठक स्वयं अपने भीतर के प्रश्नों का उत्तर खोज सके।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक पाठकों के मन में नए विचारों और चिंतन-मनन की प्रेरणा देगी।
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार एवं भाषाविद् संत समीर और विभागाध्यक्ष- कलानिधि के प्रो अनिल कुमार सहित साहित्य, संस्कृति और पत्रकारिता जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रही।

