पहाड़ी झीलों और हिमस्खलन से बाढ़ व आपदा से निपटने की तैयारियों पर समीक्षा बैठक

पहाड़ी झीलों और हिमस्खलन से बाढ़ व आपदा से निपटने की तैयारियों पर समीक्षा बैठक
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को दिल्ली में हिमालयी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) और हिमस्खलन के जोखिमों से निपटने की तैयारियों के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।उल्लेखनीय है कि हाल ही में नेपाल में जीएलओएफ के चलते बाढ़ आई थी जिससे बड़े स्तर पर जनहानि हुई है।

गृह सचिव ने स्पष्ट किया कि जीएलओएफ और हिमस्खलन से निपटने की रणनीतियां केवल प्रतिक्रिया-केंद्रित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोखिम-सूचित योजना, निवारक शमन उपायों और सामुदायिक स्तर की तैयारियों पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों को वर्ष 2024 में स्वीकृत केंद्र सरकार की जीएलओएफ शमन परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों की निरंतर निगरानी तथा उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान, चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना और अंतिम छोर तक समयबद्ध सूचना का प्रसार, राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन और वैज्ञानिक-तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और जल-प्रवाह मार्गों का निर्धारण, निकासी की योजनाएं और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक संसाधनों की पूर्व तैनाती पर जोर दिया गया।बैठक का समापन अंतर-एजेंसी समन्वय को निरंतर बनाए रखने और नियमित रूप से सूचनाओं के आदान-प्रदान के निर्देशों के साथ हुआ, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

इस बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (एसडीएमए) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

anand prakash

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