विपक्षी दलों ने की सोनम वागंचुक को अस्पताल ले जाने की निंदा

विपक्षी दलों ने की सोनम वागंचुक को अस्पताल ले जाने की निंदा
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नई दिल्ली। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आआपा), समाजवादी पार्टी (सपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) सहित अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कड़ी निंदा की है।

कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने एक्स पोस्ट में कहा कि हमारा संविधान हर नागरिक को अपनी आवाज उठाने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार देता है, लेकिन गृह मंत्रालय का रवैया इसी अधिकार को निशाना बनाने जैसा है।

खेड़ा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और एक दिन पहले ही नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति हुई है। अगर आज की कार्रवाई उनका पहला संदेश है, तो यह साफ है कि उनकी वफादारी संवैधानिक कर्तव्य से ज्यादा सत्ता के प्रति है।

आआपा संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें जबरदस्ती उठाने के बजाय मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी। कॉकरोच आंदोलन को कुचलने के बजाय देश के एजुकेशन और एग्जामिनेशन सिस्टम में सुधार करें। सोनम वांगचुक से जबरदस्ती निपटने में ही सरकार की हार है।

राष्टीय प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस से इंटेलिजेंस में चूक हुई और उन्होंने ‘कॉकरोच मूवमेंट’ से ‘जेन-जी’ के जुड़ाव को कम करके आंका। घबराहट में मोदी सरकार ने पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को बदल दिया और नए कमिश्नर ने अपने पहले ही दिन सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने का फैसला किया।

आआपा के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पेपर लीक के लिए यह समाधान दिया है कि जो भी पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाए, उसे गुंडों से पिटवाओ और उसे आवाज उठाने ही मत दो। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सोनम वांगचुक को उनके अनिश्चितकालीन अनशन स्थल से ‘बल’ के प्रयोग से जबरन हटाना अत्यंत निंदनीय घटना है। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए भ्रामक सादे लिबास में अचानक घुस आए लोगों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए।

सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि सोनम वांगचुक को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं है बल्कि लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी बर्दाश्त नहीं कर सकती यह अत्याचार है। जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी घायल होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज को दबाना, देश की आत्मा को दबाने जैसा है।

सीपीआई-एम के नेताओं ने सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके को जबरदस्ती हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की हैं। उन्होंने कहा परीक्षा पेपर लीक होने के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और शिक्षा मंत्री को जवाबदेह ठहराने के बजाय सरकार शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबा रही है। सरकार जवाबदेही से बचना चाहती है। इस कार्रवाई से ठीक पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अचानक हटाए जाने से पुलिस तंत्र के राजनीतिक दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिन से अनशन पर बैठे वांगचुक को शनिवार सुबह सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है। वह सोशल मीडिया अभियान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से शुरू किए गए शांतिपूर्ण आंदोलन में शिक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर केन्द्रीय शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

anand prakash

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