देश में पांच लाख से अधिक लोगों ने ली अंगदान की प्रतिज्ञा

देश में पांच लाख से अधिक लोगों ने ली अंगदान की प्रतिज्ञा
Facebook WhatsApp

नई दिल्ली। अंगदान अभियान के तहत पांच लाख से अधिक लोगों ने अंगदान प्रतिज्ञा ली है। यह उपलब्धि देश में अंग एवं ऊतक दान के प्रति बढ़ती जागरूकता, संवेदनशीलता और लोगों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अंगदान को अब एक ऐसे मानवीय कार्य के रूप में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है, जो प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को नया जीवन देने का अवसर प्रदान करता है। यह उपलब्धि स्वैच्छिक अंग एवं ऊतक दान को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का भी परिणाम मानी जा रही है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने देशवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, स्वास्थ्यकर्मियों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया संस्थानों तथा अन्य सहयोगी संगठनों ने जागरूकता फैलाने और लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के सहयोग की भी सराहना की।

उन्होंने कहा कि अंगों और ऊतकों की बढ़ती मांग तथा उपलब्धता के बीच अंतर को कम करने के लिए जागरूकता अभियान, संस्थागत क्षमता निर्माण और प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश में अंग प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया नैतिक, पारदर्शी, समानतापूर्ण और मरीज-केंद्रित बनी रहे।

डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अंगदान के महत्व पर दिए गए संदेशों से भी इस अभियान को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर नागरिकों से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की है, जिससे इस विषय पर सकारात्मक जनजागरूकता बढ़ी है।

अंगदान प्रतिज्ञा की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आधार आधारित पंजीकरण पोर्टल notto.abdm.gov.in शुरू किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक सुरक्षित और सरल तरीके से अपनी अंगदान प्रतिज्ञा दर्ज कर सकते हैं।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page