मध्य प्रदेश की दीक्षा ने चने की दाल के 12 दानों पर 12 ज्योतिर्लिंगों की पेन्टिंग कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

मध्य प्रदेश की दीक्षा ने चने की दाल के 12 दानों पर 12 ज्योतिर्लिंगों की पेन्टिंग कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन की प्रतिभाशाली बेटी दीक्षा को दी बधाईभोपाल, 04 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन की बेटी दीक्षा कुशवाह ने मात्र 22 मिनट में आठ मिलीमीटर आकार के चने की दाल के 12 दानाें पर 12 ज्योतिर्लिंगों की पेंटिंग बनाकर वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर दीक्षा को बधाई दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक पर अपने बधाई संदेश में कहा है कि उज्जैन की प्रतिभाशाली बेटी दीक्षा की कला को वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है। दीक्षा ने केवल 22 मिनट में 8 मिमी आकार की चने की दाल के 12 दानों पर 12 ज्योतिर्लिंगों की पेंटिंग बनाकर असाधारण कला का प्रदर्शन कर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने उसे उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षा ने अपनी प्रतिभा से देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल होकर दीक्षा ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर ली है।

उज्जैन के ऋषि नगर निवासी प्रतिभाशाली दीक्षा कुशवाह उत्कृष्ट विद्यालय की कक्षा 12वीं में अध्ययनरत हैं। वह शहर के शहर के फ्रीगंज स्थित एक आर्ट क्लास की भी छात्रा हैं। वहां बच्चों को देखकर दीक्षा ने सूक्ष्म कला सीखी। मात्र एक वर्ष की कड़ी मेहनत से उन्होंने एक अनूठा कीर्तिमान रच दिया। दीक्षा ने यह मुकाम पाने के लिए काफी मेहनत की और 22 मिनट में 8 मिलीमीटर आकार की चने की दालों पर सटीकता व बारीकी के साथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की आकृतियां उकेर दीं।

दीक्षा ने बताया कि 12 ज्योतिर्लिंग बनाने की प्रेरणा उन्हें केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा महाकाल के दर्शन के बाद मिली। इसके अलावा डिग्री कोर्स के दौरान कॉलेज के कई विद्यार्थियों ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए थे। साथी विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देखकर तथा सबसे छोटे ज्योतिर्लिंग बनाने की इच्छाशक्ति से ही यह कार्य संभव हो पाया। इतनी छोटी दाल पर शिवलिंग की आकृति उकेरना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसके लिए विशेष उपकरणों के साथ-साथ धैर्य, स्थिर हाथ और गहन एकाग्रता की आवश्यकता रही।

anand prakash

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