“लालू की पाठशाला” इतनी ही मजबूत होती, तो उनके करीबी नेता भाजपा में क्यों आते : गिरिराज सिंह

“लालू की पाठशाला” इतनी ही मजबूत होती, तो उनके करीबी नेता भाजपा में क्यों आते : गिरिराज सिंह
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बेगूसराय। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी यादव के “लालू की पाठशाला” वाले बयान का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि “लालू की पाठशाला” इतनी ही मजबूत और प्रभावी होती, तो उनके करीबी नेता वहां से निकलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन क्यों थामते।

शनिवार को बेगूसराय पहुंचे गिरिराज सिंह ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में परिवारवाद अपने चरम पर है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के कारण कई नेताओं को अलग रास्ता चुनना पड़ा और उन्होंने भाजपा का रुख किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा एक व्यापक विचारधारा वाली पार्टी है, जिसे उन्होंने “गंगा और समुद्र” की संज्ञा दी। उनके अनुसार, भाजपा में शामिल होने वाले नेता किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी इच्छा, विश्वास और विचारधारा के कारण पार्टी का हिस्सा बनते हैं।

गिरिराज सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और भाजपा की विचारधारा को मजबूत कर रहे हैं।

कर्नाटक की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने दावा किया कि जैसे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन की स्थिति बन रही है, वैसे ही कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार का भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वहां भी बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि पीडीएस घोटाले में हो रही कार्रवाई भ्रष्टाचार की पोल खोल रही है। उन्होंने कहा कि जो जैसा करेगा, उसे वैसा ही परिणाम भुगतना पड़ेगा।

anand prakash

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