अमेरिका ने पीओके और अक्साई चिन को बताया भारत का हिस्सा

अमेरिका ने पीओके और अक्साई चिन को बताया भारत का हिस्सा
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नई दिल्ली। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रुपरेखा की घोषणा के तत्काल बाद संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय द्वारा जारी नक्शे में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन समेत पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया है।यूएसटीआर कार्यालय के एक्स पोस्ट पर शेयर किए गए इस नए नक्शे में न केवल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का हिस्सा दिखाया गया है, बल्कि अरुणाचल प्रदेश के सभी हिस्सों को भी भारत की क्षेत्रीय सीमा के भीतर दर्शाया गया है।

इससे पहले भारत कई बार अमेरिकी और अन्य वैश्विक एजेंसियों द्वारा जारी नक्शों में जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश की गलत प्रस्तुति पर आपत्ति जताता रहा है। अब ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी नक्शा को उन आपत्तियों के बाद सही से तैयार किया गया है।

यह कदम भारत के रुख के अनुरूप और अमेरिका की पुरानी नीति से अलग है, क्योंकि पहले अमेरिकी एजेंसियों द्वारा जारी नक्शों में पीओके को विवादित क्षेत्र बताने के लिए डॉटेड लाइनों या अलग लेबल का इस्तेमाल किया जाता था।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने 2020 में एक राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के कुछ हिस्सों और गुजरात के जूनागढ़ एवं सर क्रीक पर दावा किया था। भारत ने इसे राजनीतिक मूर्खता बताते हुए खारिज कर दिया था। इसी तरह चीन ने अगस्त 2023 में एक नक्शा जारी किया था, जिसमें अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना हिस्सा दिखाया गया था। भारत ने इन दावों को भी सिरे से नकारते हुए कहा था कि नक्शे बनाने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।

पीओके विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 से चला आ रहा है। विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी, जिसके महाराजा हरि सिंह ने पाकिस्तान के हमले के बाद भारत में विलय का निर्णय लिया। इसके बाद पाकिस्तान ने पश्चिमी और उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे आज पीओके कहा जाता है। पाकिस्तान इसे आजाद कश्मीर कहता है और वहां अपनी तरह की सरकार चलाता है।

अक्साई चिन क्षेत्र लद्दाख के उत्तर-पूर्व में स्थित है। चीन ने 1950 के दशक में यहां सड़क निर्माण कर कब्जा जमा लिया था। साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद चीन ने लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखा। भारत इसे लद्दाख का हिस्सा मानता है।

anand prakash

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