विपक्ष के हंगामें से लोकसभा की कार्यवाही तीसरे दिन भी रहा बाधित

विपक्ष के  हंगामें से लोकसभा की कार्यवाही तीसरे दिन भी रहा बाधित
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नई दिल्ली। विपक्ष के भारी हंगामें के कारण बुधवार को लगातार तीसरे दिन लोकसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। बार-बार के व्यवधान और तीन स्थगनों के बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया जिसके चलते पहले 12 बजे और फिर 02 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोपहर बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई लेकिन वह भी अधिक देर तक नहीं चल सकी। इसके बाद सदन की कार्यवाही शाम 05 बजे तक के लिए स्थगित की गई। शाम को भी हंगामा जारी रहने पर लोकसभा को अगले दिन गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कुछ पुस्तकों का हवाला दिया। निशिकांत ने कहा कि एक किताब पर चर्चा चल रही है, किताब प्रकाशित नहीं हुई है। वे उन किताबों के बारे में बताना चाहते हैं जिनमें नेहरू परिवार कांग्रेस परिवार के बारे में लिखा गया है। यह किताबें छपी हुई हैं। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने लगातार विरोध किया, जिसके कारण कार्यवाही बाधित होती रही। पीठासीन अधिकारी ने उन्हें अध्यक्ष की व्यवस्था का हवाला देते हुए विषय से संबंधित बात रखने को कहा। दूसरी ओर विपक्ष का हंगामा जारी रहा। इसके चलते सभा की कार्यवाही 5 बजे तक स्थगित कर दी गई।

शाम में कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी के बोलने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। कुछ सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप तक पहुंच गए, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वक्तव्य को लेकर पिछले दो दिनों से विवाद बना हुआ है। राहुल गांधी पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक से जुड़े संदर्भ रखना चाहते थे, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को अपनी बात रखने नहीं दी जा रही है। इसी से जुड़े हंगामे के दौरान मंगलवार को विपक्ष के 8 सांसदों को सदन से निलंबित भी किया गया था।

anand prakash

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