देश में 2036 तक 60 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, जीडीपी में शहरों का होगा 70 फीसदी का योगदान: आर्थिक सर्वेक्षण

देश में 2036 तक 60 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, जीडीपी में शहरों का होगा 70 फीसदी का योगदान: आर्थिक सर्वेक्षण
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नई दिल्ली। देश में शहरी आबादी और उसकी जीडीपी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। साल 2015 में देश की 63 फीसदी शहरी क्षेत्र से जुड़ी थी जो 2011 की जनगणना के हिसाब से 31 फीसदी ज्यादा थी।विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक साल 2036 तक शहरों में 60 करोड़ लोग रहेंगे, जो कुल आबादी का 40 फीसदी होगा और जीडीपी में 70 फीसदी योगदान देंगे।

यह जानकारी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद भवन में पेश किए आर्थिक सर्वेक्षण में दी। इस सर्वेक्षण में बताया गया कि देश में शहरीकरण बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। देश की जीडीपी का 70 फीसदी हिस्सा इन शहरों से ही आता है। इन शहरों में लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मेट्रो और रैपिड रेल का विकास तेजी से किया जा रहा है। अभी देश के 24 शहरों में 1,036 किलोमीटर मेट्रो और आरआरटीएस नेटवर्क चालू है।

सर्वेक्षण में बताया गया कि पिछले दशक में भारत ने तेज़ी से मेट्रो और आरआरटीएस का विस्तार किया है। पीएम ई-बस सेवा के तहत 10,000 ई-बसें लाई जा रही हैं। वित्त वर्ष 2025 में 7,293 ई-बसों को मंजूरी दी गई है और इनके लिए डिपो व बिजली ढांचे पर निवेश हुआ है।

शहरों में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी और अमृत योजनाओं के तहत खुले में शौच पूरी तरह खत्म हो गया है। 2014-15 में जहां घर-घर कचरा संग्रहण लगभग न के बराबर था, वहीं अब यह 98 प्रतिशत शहरी वार्डों तक पहुंच गया है। इसके लिए देशभर में 2.5 लाख से ज्यादा गाड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है। 98 प्रतिशत शहरी वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण हो रहा है और प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत 122.06 लाख मकानों को मंजूरी दी जा चुकी है।

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 8,067 में से 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। इनमें स्मार्ट सड़कें, साइकिल ट्रैक, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, पानी और सीवरेज नेटवर्क अपग्रेडेशन और सार्वजनिक स्थानों का विकास शामिल है। इस पर करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

आवास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत अब तक 122.06 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 96.02 लाख मकान पूरे होकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। वहीं, पीएम स्वनिधि योजना ने शहरी रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका को मजबूत किया है।

anand prakash

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