‘पराक्रम दिवस’ अब राष्ट्र की चेतना का हिस्साः प्रधानमंत्री मोदी

‘पराक्रम दिवस’ अब राष्ट्र की चेतना का हिस्साः प्रधानमंत्री मोदी
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अंडमान। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पराक्रम दिवस की भावना को आत्मसात करते हुए भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के जरिए नेताजी के सपनों को जी रहा है, ताकि उनका दूरदर्शी दृष्टिकोण आज की युवा पीढ़ी की प्रेरणा बन सके।प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात आज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित पराक्रम दिवस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कही। इस दौरान उन्होंने नेताजी सुभाष को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिवस पर आयोजित इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लाल किले में नेताजी संग्रहालय से लेकर कर्तव्य पथ पर उनकी भव्य प्रतिमा तक, सरकार युवाओं को नेताजी के दृष्टिकोण से जोड़ने का प्रयास कर रही है। उनके आदर्शों का सम्मान करना और उनसे प्रेरणा लेना ही एक विकसित भारत के हमारे संकल्प को ऊर्जा और आत्मविश्वास से भर देता है। सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी स्थापित किए गए हैं। यह सभी न केवल नेताजी सुभाष के प्रति सम्मान का प्रतीक हैं बल्कि हमारे युवाओं और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के अमर स्रोत भी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों का आत्मनिर्भरता का संकल्प ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करेगा। पहले भारत केवल विदेशों से हथियार आयात करने पर निर्भर था, लेकिन आज भारत का रक्षा निर्यात 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। स्वदेशी रूप से निर्मित ब्रह्मोस और अन्य मिसाइलें वैश्विक स्तर पर अपनी पैठ बना रही हैं। भारत आत्मनिर्भरता की शक्ति से अपने सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण कर रहा है। प्रधानमंत्री ने 23-30 जनवरी तक चलने वाले आयोजनों की श्रृंखला का उल्लेख करते हुए कहा कि पराक्रम दिवस, राष्ट्रीय मतदाता दिवस, गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट और बापू की पुण्यतिथि का यह संगम गणतंत्र के उत्सव की एक नई और गौरवशाली परंपरा है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के कारण एक लंबे समय तक स्वतंत्रता का श्रेय केवल एक परिवार को दिया गया और अंडमान जैसे ऐतिहासिक स्थलों की उपेक्षा की गई। नेताजी की वीरता और साहस सभी भारतीयों को प्रेरित करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा से भर देते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान की धरती इस विश्वास का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का विचार कभी समाप्त नहीं होता। यहां कई क्रांतिकारियों को यातनाएं दी गईं और कई योद्धाओं ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी बुझने के बजाय और भी मजबूत हुई। उन्होंने विपक्ष दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित किया जाना चाहिए था, लेकिन उस समय सत्ता में आए लोगों में असुरक्षा की भावना थी। वे स्वतंत्रता का श्रेय केवल एक परिवार को देना चाहते थे और इसी राजनीतिक स्वार्थ के चलते राष्ट्र के इतिहास की उपेक्षा की गई।

पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ रखने को लेकर नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह एक ऐसा नाम है जो हमें नेताजी की विजय की याद दिलाता है। इसी प्रकार अन्य द्वीपों का नाम बदलकर स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और सुभाष द्वीप रखा गया। 2023 में अंडमान के 21 द्वीपों का नाम 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया। आज अंडमान और निकोबार में गुलामी से जुड़े नाम मिटाए जा रहे हैं और स्वतंत्र भारत के नए नाम अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ अंडमान और निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर, एडमिरल डीके जोशी (सेवानिवृत्त), नेताजी सुभाष चंद्र बोस आईएनए ट्रस्ट के अध्यक्ष, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) आर.एस. चिकारा और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतिभागी और आईएनए के चिरस्थायी व्यक्तित्व लेफ्टिनेंट आर. माधवन भी उपस्थित थे।

anand prakash

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