भारत और जर्मन में रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापारिक सहयोग पर जोर

भारत और जर्मन में रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापारिक सहयोग पर जोर
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच सोमवार को गांधीनगर (गुजरात) में बैठक हुई। इस दौरान भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने के लिए रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, ऊर्जा और जन-जन संपर्क सहित अनेक क्षेत्रों में व्यापक समझौते हुए और बाद में कई घोषणाएं की गईं।दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, आर्थिक सहयोग के लिए सीईओ फोरम, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, क्रिटिकल मिनरल्स, दूरसंचार और उभरती तकनीकों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त घोषणापत्रों पर सहमति जताई।

हरित हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, नवीकरणीय ऊर्जा और जैव-अर्थव्यवस्था में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए समझौते हुए। आयुर्वेद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग को विस्तार दिया गया। सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने हेतु खेल, डाक सेवाएं, समुद्री विरासत और युवा हॉकी विकास पर समझौते किए गए।

इसके अलावा, भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी में वीज़ा-फ्री ट्रांजिट, इंडो-पैसिफिक संवाद, डिजिटल डायलॉग और हरित विकास के लिए 1.24 अरब यूरो की नई फंडिंग जैसी महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने 12-13 जनवरी को भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह उनकी भारत की पहली और चांसलर बनने के बाद एशिया की भी पहली यात्रा थी, जो भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जर्मनी के एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में दिए गए महत्व को दर्शाती है। चांसलर मर्ज के साथ 23 प्रमुख जर्मन सीईओ और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया।

दोनों नेताओं के बीच आज सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। बातचीत में साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी। रक्षा और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया गया। सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, नौसैनिक सहयोग और नई ‘ट्रैक 1.5 विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद’ की स्थापना का स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए सीमा-पार आतंकवाद सहित सभी रूपों में आतंक के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के बाद प्रेसवार्ता में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक संपत्ति बताया। मिस्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में उल्लेखनीय और आशाजनक प्रगति हो रही है। साथ ही, लोगों से लोगों के संपर्क संबंधों की बड़ी ताकत है। जर्मनी में भारतीय प्रवासी और छात्रों की संख्या तेजी से बढ़कर क्रमश: लगभग तीन लाख और 60 हजार हो गई है।

भारत-जर्मनी सुरक्षा सहयोग पर विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा खरीद नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है, न कि किसी विचारधारा पर। किसी एक देश से खरीद को दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाता। यदि स्वदेशी उत्पादन संभव न हो, तो भारत विश्व में जहां सबसे उपयुक्त हो, वहां से रक्षा सामग्री प्राप्त करता है।

ईरान और ग्रीनलैंड पर चर्चा के विवरण साझा किए बिना विदेश सचिव ने कहा कि भारत ईरान के घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और छात्र मौजूद हैं। प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय दूतावास छात्रों से संपर्क में है और सभी सुरक्षित हैं। भारतीयों को अशांति वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

जर्मनी में फोस्टर केयर में रह रही भारतीय बच्ची आरिहा शाह के मामले पर विदेश सचिव ने कहा कि भारत सरकार जर्मन अधिकारियों के साथ लंबे समय से संवाद में है। इसे कानूनी के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। भारत परिवार की पीड़ा को समझता है और हर संभव सहायता कर रहा है। प्रयास है कि आरिहा भारतीय परिवेश, भाषा और संस्कृति से जुड़ी रहे।

वार्ता में दोनों देशों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का स्वागत किया। 2024 में भारत-जर्मनी व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। दोनों नेताओं ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने के समर्थन को दोहराया और जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण दिया।

वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों नेताओं ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर अपनी चिंता दोहराई, जिससे भारी मानवीय पीड़ा और दुनिया भर में नकारात्मक परिणाम हो रहे हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति हासिल करने के प्रयासों के लिए समर्थन व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने गाजा शांति योजना का स्वागत किया और गाजा में संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में पिछले साल 17 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 को अपनाने पर ध्यान दिया। उन्होंने सभी पक्षों को इस प्रस्ताव को पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि करते हुए, नेताओं ने वैश्विक वाणिज्य, कनेक्टिविटी और समृद्धि को नया आकार देने और बढ़ावा देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया। इस संदर्भ में, वे इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय बैठक की उम्मीद कर रहे हैं।

नेताओं ने जलवायु परिवर्तन पर त्वरित वैश्विक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया और यूएनएफसीसीसी प्रक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने पेरिस समझौते के महत्व और बेलेम में कॉप-30 की पुष्टि की।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद में चांसलर मर्ज का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लिया। इसके अलावा दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी सीईओ फोरम को संबोधित किया। चांसलर मर्ज की बेंगलुरु यात्रा भी प्रस्तावित रही, जहां व्यापार और तकनीकी सहयोग से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

anand prakash

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