इसरो 12 जनवरी को आठ विदेशी सहित 16 उपग्रहों को कक्षा में भेजेगा

इसरो 12 जनवरी को आठ विदेशी सहित 16 उपग्रहों को कक्षा में भेजेगा
Facebook WhatsApp

चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने पीएसएलवी-सी62 मिशन के तहत सोमवार (12 जनवरी) को ईओएस-एन1 (ईओएस-एन1) नामक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह सहित कुल 16 उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करेगा।इनमें आठ विदेशी उपग्रह भी शामिल हैं। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से किया जाएगा।

इसरो की ओर से शनिवार को जारी बयान में बताया गया कि यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। ईओएस-एन1 उपग्रह के साथ 14 सहायक पेलोड (अनुसंधान उपकरण/उपग्रह) भेजे जाएंगे, जिनमें भारत के अलावा कई विदेशी ग्राहकों के पेलोड भी शामिल हैं।

इसरो के अनुसार, रॉकेट और उपग्रहों का एकीकरण पूरा हो चुका है और प्री-लॉन्च परीक्षण जारी हैं। पीएसएलवी-सी62 को 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे प्रक्षेपित किया जाएगा। इसके लिए 25 घंटे की काउंटडाउन प्रक्रिया 11 जनवरी से शुरू होगी। यह पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान होगी।

ईओएस-एन1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम के सहयोग से विकसित किया गया है। रॉकेट के प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट बाद उपग्रह को निर्धारित सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा। पूरा मिशन दो घंटे से अधिक समय तक चलेगा।

इस मिशन की एक विशेष उपलब्धि यह है कि स्पेन की कंपनी का केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (केआईडी)) कैप्सूल रॉकेट के चौथे चरण (पीएस4) से लगभग दो घंटे बाद अलग किया जाएगा। आमतौर पर पीएसएलवी मिशनों में उपग्रह 20 मिनट के भीतर अलग हो जाते हैं, लेकिन इस मिशन में एक नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।

अंतरिक्ष मलबे (स्पेस डेबरीज) को कम करने के उद्देश्य से इसरो चौथे चरण के इंजन को दोबारा सक्रिय कर उसकी गति कम करेगा, जिसे डी-बूस्ट प्रक्रिया कहा जाता है। इसके बाद ही स्पेनिश केआईडी कैप्सूल को अलग किया जाएगा। अंततः चौथा चरण और कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जल जाएंगे और शेष अवशेष दक्षिण प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से गिरेंगे, जिसे स्प्लैशडाउन कहा जाता है।

उल्लेखनीय है कि अब तक 60 से अधिक सफल उड़ानें भर चुका पीएसएलवी रॉकेट चंद्रयान-1, मंगलयान जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। उसी विश्वसनीयता और तकनीकी दक्षता के साथ इसरो यह नया और चुनौतीपूर्ण मिशन पूरा करने जा रहा है।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page