मौलिक दायित्व निर्वहन के तहत उर्दू भाषा का करें प्रचार प्रसार: मो. सरफराज 

मौलिक दायित्व निर्वहन के तहत उर्दू भाषा का करें प्रचार प्रसार: मो. सरफराज 
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– प्रभारी पदाधिकारी ने संबंधित कर्मियों को दिए कई निर्देश 

मोतिहारी। उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार से संबंधित मासिक समीक्षात्मक बैठक, मो. सरफराज नवाज, प्रभारी पदाधिकारी जिला उर्दू भाषा कोषांग-सह- उप निर्वाचन पदाधिकारी की अघ्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित डॉ. राधाकृष्ण भवन में हुई। प्रभारी पदाधिकारी ने निदेेश दिया कि प्रत्येक मासिक बैठक में सभी उर्दू कर्मी,  वांछित प्रतिवेदन के साथ ससमय अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे। विलम्ब से आने वाले या बिना पूर्व सूचना/अनुमति अनुपस्थित कर्मियों के विरुद्ध नियमानुकूल कार्रवाई की जायेगी। वहीं उन्होंने

सभी उपस्थित उर्दू कर्मी से मासिक प्रगति प्रतिवेदन की मांग की।  वहीं संबधित उर्दू कर्द्वामियों के द्वारा   प्रतिवेदन में दर्ज किये गये प्रविष्टि की समीक्षा की। इस क्रम में सभी कर्मी को निदेश दिया गया कि सभी उर्दू कर्मी अपने  क्षेत्र में उर्दू के प्रचार-प्रसार तथा आम जन के बीच उर्दू भाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित करने का प्रयास करें। साथ ही अपने-अपने  कार्यालय में पदस्थापित कर्मचारी को भी यथासंभव  उर्दू भाषा सीखने के  प्रेरित करने का प्रयास करें।

.उर्दू संबंधी गतिविधियां कार्यालय में बनाए रखें। इस कार्य से उर्दू  भाषा के प्रगति एवं प्रचार प्रसार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उर्दू विधार्थी प्रोत्साहन योजना अन्तर्गत वाद-विवाद प्रतियोगिता के आयोजन की समीक्षा की गई। सहायक उर्दू अनुवादकों के बिपार्ड में प्रशिक्षण के लिए चले जाने, फरवरी  में मैट्रिक एवं इंटर परीक्षा के आयोजन को देखते हुए मार्च माह के तीसरे सप्ताह में कराने का निर्णय लिया गया। 

 निर्देशित किया गया कि निदेशालय एवं जिलाधिकारी  के निदेश का अनुपालन करते हुए साप्ताहिक विद्यालय भ्रमण सुनिश्चित करे तथा प्रतिवेदन जिला उर्दू भाषा कोषांग को भेजें।  जबकि 

 जिन विद्यालयों का नाम अभी तक हिंदी के साथ उर्दू में भी प्रदर्शित नहीं है, उसकी भी सूचि तैयार कर कोषांग को भेजे

बैठक के समापन चरण में प्रभारी पदाधिकारी द्वारा सभी उपस्थित उर्दू कर्मियों के बीच उर्दू पत्रिका  उर्दू दुनिया ए बच्चों कि दुनिया एवं ख्वातीन ए दुनिया कि तक़सीम की गयी। जबकि  निर्देश दिया गया कि सभी उर्दू कर्मी अपने अपने स्तर से अपने मौलिक दायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उर्दू भाषा के विकास पर जोर देते हुए इसका विकास सुनिश्चित करेगे।

anand prakash

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