एसआईआर के विरोध का मकसद घुसपैठियों को मतदाता सूची में बनाए रखना : अमित शाह

एसआईआर के विरोध का मकसद घुसपैठियों को मतदाता सूची में बनाए रखना : अमित शाह
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध केवल इसलिए किया जा रहा है ताकि घुसपैठियों को मतदाता सूची में बनाए रखा जा सके।अमित शाह ने लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए विपक्ष खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लगाए आरोपों का जवाब दिया। इस दौरान गृहमंत्री ने विपक्ष पर घुसपैठ का बचाव करने का आरोप लगाया। इसी बीच विपक्ष के सदन से बाहिर्गमन किया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि विपक्ष डर के भाग गया। विपक्ष ने दो सत्रों को इस मुद्दे पर बर्बाद किया अब जब बारीकी से बता रहे हैं तो भाग गए। वहीं, शाह ने कहा कि नेहरु, इंदिरा, राजीव और सोनिया पर बोलने पर कांग्रेस ने लोकसभा का बहिष्कार नहीं किया, लेकिन घुसपैठियों पर बोलने पर कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष 200 बार भी सदन का बहिष्कार करेगा, फिर भी हम एक भी घुसपैठिये को मतदान का अधिकार नहीं देंगे।

शाह ने कहा कि देश एक बार जनसाख्यिकी के आधार पर बंट चुका है और हम नहीं चाहते कि आने वाली पीढ़ी फिर से जनसांख्यिकी के आधार पर देश का बंटवारा देखे। जनसांख्यिकी में भारी बदलाव लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा है तथा एनडीए सरकार की नीति स्पष्ट रूप से पहचान करो, हटाओ और वापस भेजो (डिटेक्ट, डिलिट और डिपोर्ट) की है। वहीं विपक्ष घुसपैठ को सामान्य कर उसे मान्यता देना चाहता है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर पर चार महीने से एकतरफा झूठ फैला कर देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। मृत्यु होने या दो जगह पर मतदाता होने पर नाम काटना, 18 वर्ष की आयु होने पर नाम जोड़ना और घुसपैठियों को चुन-चुन कर डिलीट करना ही एसआईआर है। घुसपैठिये पीएम और सीएम का चुनाव कर, देश को असुरक्षित न बना पायें, इसीलिए मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूरी है, और उसी का नाम एसआईआर है।

घुसपैठ रोकने के लिए अपनी सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए शाह ने पश्चिम बंगाल सरकार पर इसे बढ़ावा देने का आरोप लगया। उन्होंने कहा कि बिहार ने घुसपैठ के खिलाफ मत दिया अब बंगाल भी यही करने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि घुसपैठिये बंगाल से लगती सीमा से आते हैं, उनका आधार और राशन कार्ड वहां बनता है वे वहां की मतदाता सूची में है। क्या पश्चिम बंगाल सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है? उन्होंने विपक्ष से कहा कि घुसपैठ के आधार पर चुनाव जीत जाओगे लेकिन देश की सुरक्षा को ताक पर रख दोगे।

चुनाव सुधारों पर चर्चा का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सत्र की शुरुआत में दो दिन तक गतिरोध रहा, जिससे यह गलत धारणा बनी कि सरकार चर्चा से बच रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा-एनडीए चर्चा से कभी नहीं भागती, लेकिन विपक्ष चर्चा को एसआईआर के नाम पर केन्द्रित करना चाहता था, जबकि यह विषय चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है। शाह ने स्पष्ट किया कि एसआईआर, मतदाता सूची को अद्यतन करने की चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, और इस पर सदन में नीतिगत चर्चा संभव नहीं थी।

शाह ने संविधान के अनुच्छेद 324, 326 और 327 का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची तैयार करने, सुधारने तथा चुनावों पर संपूर्ण नियंत्रण की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को दी गई है। उन्होंने दावा किया कि हाल के महीनों में विपक्ष द्वारा एसआईआर के खिलाफ झूठा प्रचार चलाया गया, जबकि 1952 से 2004 तक हुए सभी एसआईआर पर किसी भी राजनीतिक दल ने कभी आपत्ति नहीं की थी। 2025 में होने वाला एसआईआर उसी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।

गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार घुसपैठ को बढ़ावा देती रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से लगती 2216 किलोमीटर सीमा में से 553 किलोमीटर का काम केवल पश्चिम बंगाल में लंबित है, जबकि असम, मेघालय, त्रिपुरा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और गुजरात में सीमा निर्माण पूरा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता ने हाल में घुसपैठियों-बचाओ यात्रा का जवाब प्रचंड जनादेश देकर दिया है और बंगाल भी यही करने जा रहा है।

शाह ने राहुल गांधी द्वारा हरियाणा के एक पते पर 501 वोट दर्ज होने के आरोप को गलत करार देते हुए कहा कि यह एक बड़ा पुश्तैनी संयुक्त आवास है, जहां कई परिवार साथ रहते हैं और सभी के लिए एक ही घर नंबर दर्ज है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की दो जगह मतदाता सूची में उपस्थिति प्रणालीगत त्रुटियों के कारण होती है, क्योंकि 2010 में डुप्लीकेट नाम हटाने की आरओ की शक्ति समाप्त कर दी गई थी। एसआईआर का उद्देश्य इसी प्रकार की त्रुटियों को सुधारना है।

गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने 2014 के बाद से चुनाव सुधारों पर एक भी सुझाव चुनाव आयोग को नहीं दिया है, जबकि शीर्ष अदालत ने वर्षों पहले ईवीएम की प्रक्रिया को वैध ठहराया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तब ईवीएम पर सवाल नहीं उठाती थी जब वह 2004 और 2009 में जीतती थी, लेकिन हारने पर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष से अगर कोई संवाददाता प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछता है, तो उसे भाजपा का एजेंट कहा जाता है। अगर वे केस हारते हैं, तो वे जज पर आरोप लगाते हैं, अगर वे चुनाव हारते हैं, तो वे ईवीएम पर दोष लगाते हैं। अब जब ईवीएम का आरोप काम नहीं आया, तो वे वोट चोरी की बात ले आए। फिर भी वे हार गए। शाह ने कहा कि कांग्रेस का चुनाव हराने का कारण ईवीएम या वोट चोरी नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व है और एक दिन कांग्रेस का कार्यकर्ता इसका हिसाब जरूर मांगेगा

अतीत के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि आजादी के बाद प्रधानमंत्री के चुनाव में सरदार पटेल को 28 और नेहरू को केवल दो वोट मिले थे, फिर भी प्रधानमंत्री नेहरू बने। उन्होंने इंदिरा गांधी के चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने और उसके बाद कानून में संशोधन को वोट चोरी को ढकने का उदाहरण बताया। साथ ही अभी दिल्ली की एक अदालत में पहुंचे उस वाद का उल्लेख किया जिसमें दावा किया गया है कि सोनिया गांधी भारत की नागरिकता मिलने से पहले मतदाता बनी थीं।

शाह ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा कई चुनाव हारने के बावजूद कभी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न नहीं उठाती। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष राज्यों में जीतता है तो मतदाता सूची ठीक लगती है, लेकिन हारने पर वही सूची गलत बताई जाती है।

सदन में विपक्ष पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार बार-बार जीतती है क्योंकि विपक्ष सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, अनुच्छेद 370 हटाने, राम मंदिर, सीएए, ट्रिपल तलाक, घुसपैठ रोकने और अब वन नेशन वन इलेक्शन जैसे सुधारों का विरोध करता है।

शाह ने स्पष्ट किया कि एक भी घुसपैठिया देश में नहीं रहने दिया जाएगा और एसआईआर आवश्यक है ताकि मतदाता सूची शुद्ध और पारदर्शी बनी रहे। उन्होंने कहा कि विपक्ष का वास्तविक उद्देश्य अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची में बनाए रखना है, जबकि एनडीए की नीति “डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट की है।

anand prakash

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