बदलते बिहार का चुनावी सफर,2020 से 2025 तक राजनीति रुख और चेहरों से लेकर जनमत तक,सब मे हुआ बदलाव

बदलते बिहार का चुनावी सफर,2020 से 2025 तक राजनीति रुख और चेहरों से लेकर जनमत तक,सब मे हुआ बदलाव
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पटना। बिहार की राजनीति फिर एक बार नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। 2020 से 2025 तक के पांच सालों में इस राज्य ने सियासत के लगभग हर रंग देख लिए- गठबंधनों की उलझनें, जनभावनाओं की करवटें और नेताओं के बीच बदलती समीकरणें।साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव ने सभी एग्जिट पोल को गलत साबित कर दिया था। नतीजों में एनडीए गठबंधन को 125 सीटें मिलीं और उसने 37.26 प्रतिशत वोट शेयर के साथ मामूली बहुमत से सरकार बनाई। दूसरी ओर, महागठबंधन 110 सीटों और 37.23% वोट शेयर के साथ बेहद करीबी अंतर से पीछे रह गया। यह अब तक का सबसे कांटे का मुकाबला माना गया। एनडीए में भाजपा सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी, जिसने 74 सीटें जीतीं। जबकि जेडीयू 43 सीटों पर सिमट गई। सहयोगी दल वीआईपी और हम ने 4-4 सीटें जीतकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। उधर, राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी। जबकि कांग्रेस को 19 और वाम दलों को 16 सीटें मिलीं। एआईएमआईएम को 5 सीटें और बसपा, लोजपा व निर्दलीयों को 1-1 सीट मिलीं।

राजनीतिक विश्लेषक व वरीय पत्रकार विनोद कुमार सिंह मानते हैं कि 2020 का जनादेश संख्या का नहीं, रणनीति का चुनाव था, जहां भाजपा की आक्रामक प्रचार शैली और नीतीश कुमार की प्रशासनिक छवि ने मिलकर सत्ता को बचा लिया।

पांच साल बाद 2025 के चुनाव में तस्वीर पूरी तरह अलग रही। दो चरणों में हुए मतदान में बंपर वोटिंग दर्ज हुई। आजादी के बाद का यह सबसे बड़ा जनसहभागिता रिकॉर्ड बना। इतनी बंपर वोटिंग ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता इस बार सिर्फ सरकार नहीं, सोच बदलने के मूड में थी। 2020 में जहां वोटिंग प्रतिशत 57.09 प्रतिशत था। वहीं 2025 में यह उछलकर 67 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया। महिलाओं और युवाओं की रिकॉर्ड भागीदारी ने बिहार के राजनीतिक मानचित्र को नया आकार दिया है। राजनीतिक विश्लेषक सुदिष्ट नारायण ठाकुर व राजन दत्त द्धिवेदी मानते हैं कि 2020 में बिहार ने स्थिरता चुनी थी, 2025 में उसने जवाबदेही मांगी है। यह वही जनता है जो अब नेताओं को नहीं, काम को वोट देने को आतुर दिख रही है।

वही पत्रकार आनंद प्रकाश का मानना है,कि बिहार की राजनीति में 2020 से 2025 के बीच बड़ा बदलाव यह रहा राजनीति गठबंधन की मजबूरी से निकलकर जनता की मजबूती तक का सफर तय करती दिख रही है। 2020 में सरकार मुश्किल से बनी थी, 2025 में जनता ने लोकतंत्र की नींव को और मजबूत कर दिया। 2020 में बिहार ने ‘किसको जिताना है’ पूछा था। 2025 में बिहार ने ‘कौन हमारे लायक है’ तय कर दिया। इतिहास गवाह है कि 2020 ने सत्ता दी थी, 2025 ने सूरत बदल दी है। बिहार अब केवल राजनीति का मैदान नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मापदंड बन चुका है।

anand prakash

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