धान खरीद का पैक्सो के वहिष्कार से किसानों को भारी नुकसान,24 सौ की जगह 19 सौ प्रति क्विंटल धान बेचने को हो रहे मजबूर
-धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य भी नहीं हुआ निर्धारित , विभाग और पैक्स के बीच पीस रहे है किसान
-अपनी मांगो पर डटे व्यापार मंडल और पैक्स , सरकार का पहल किसान हित में आवश्यक
कोटवा। मौजूदा साल में पैक्स द्वारा धान खरीद को लेकर हाथ खड़े किए जाने से किसानों की मुश्किल बढ़ने वाली है। कोटवा में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य तक निर्धारित नहीं है , ऐसे में पैक्स या विभाग की किसानों के प्रति कितनी जवाबदेही है , इसे सहज ही समझा जा सकता है। इधर 2026 – 27 के खरीफ विपणन सीजन के लिए सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है।सामान्य धान 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है जो पिछले साल से 72 रुपए की वृद्धि है।ग्रेड-ए धान 2,461 रुपए प्रति क्विंटल है जो पिछले साल से 72 रु की वृद्धि में है। गौरतलब हो कि कई राज्यों की स्थानीय मंडियों में धान का बाजार भाव अलग-अलग है , जो करीब 3,200 से 3,500 प्रति क्विंटल है। जाहिर है उक्त राज्य के किसानों की बल्ले बल्ले है। पैक्स एवं व्यापार मंडल अध्यक्षों की हड़ताल किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। धान अधिप्राप्ति को लेकर सहकारी समितियों के सामने आ रही वित्तीय और व्यावहारिक समस्याओं पर व्यापार मंडल सहित पैक्स और सरकार की सीधी बात जरूरी है , ताकि समस्या का समाधान हो जाए और किसान की धान खरीदगी शुरू हो।पैक्स अध्यक्षों की माने तो मौजूदा व्यवस्था में कई स्तरों पर परेशानियां आ रही हैं , जिसमें छह महत्वपूर्ण है। इसके कारण धान खरीद का कार्य प्रभावित होने की संभावना है। अब तक जो बाते सामने आ रही है, उसके मुताबिक सहकारी समितियों पर लगे अतिरिक्त ब्याज के भुगतान की मांग प्रमुख है। इसके साथ ही जिले के कुल धान उत्पादन का 50 प्रतिशत अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित होना भी मांग में शामिल है, ताकि किसानों से अधिक मात्रा में धान की खरीद सुनिश्चित हो सके।पैक्स अध्यक्षों की माने तो कमीशन, मिलिंग शुल्क, मंडी श्रम शुल्क और हैंडलिंग शुल्क की दरों में वर्ष 2012-13 से अब तक अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। बढ़ती लागत के बीच पुरानी दरों पर काम करना समितियों के लिए आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। इसलिए इन शुल्कों का जल्द पुनरीक्षण कर वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नई दरें निर्धारित करने की मांग की जा रही है। पैक्स, बैंक और एसएफसी के बीच त्रिपक्षीय समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा मिल टैगिंग की प्रक्रिया में पैक्सों को स्वायत्तता देने तथा प्रबंधकीय अनुदान और बोरे की राशि की दरों में वृद्धि करने की मांग भी है। अध्यक्षों की माने तो धान अधिप्राप्ति किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन मौजूदा वित्तीय व्यवस्था में समितियों को कई स्तरों पर परेशानी उठानी पड़ रही है। जाहिर है इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो पैक्स और व्यापार मंडल के लिए धान खरीद का काम सुचारू रूप से संचालित करना मुश्किल हो सकता है। इस संबंध में कोटवा के प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी अनिल शर्मा का कहना है कि जल्द ही धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित हो जायेगा। पैक्सों की समस्याओं को वरीय अधिकारियों के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया गया है , शीघ्र ही समस्या का हल निकल जायेगा।

