नेपाल को जलवायु क्षति कोष से दो करोड़ डॉलर मिलने का प्रस्ताव, भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास में होगा उपयोग

नेपाल को जलवायु क्षति कोष से दो करोड़ डॉलर मिलने का प्रस्ताव, भोटेकोशी बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास में होगा उपयोग
Facebook WhatsApp

काठमांडू। नेपाल को संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन संबंधी ढांचे के तहत गठित ‘फंड फॉर रिस्पॉन्डिंग टू लॉस एंड डैमेज’ से 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 3 अरब 4 करोड़ 16 लाख नेपाली रुपये) उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।यह राशि भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित नेपाल में पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए दी जाएगी।

इस प्रस्ताव पर निर्णय लेने के लिए जलवायु क्षति एवं नुकसान कोष ने आगामी 22 अक्टूबर को विशेष बैठक बुलाई है।

संयुक्त राष्ट्र के तहत इस कोष की स्थापना के बाद किसी विशिष्ट आपदा से निपटने के लिए पहली बार इस तरह की विशेष बैठक होने जा रही है।

भोटेकोशी बाढ़ से हुए नुकसान के बाद को नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले और कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने ‘फंड फॉर रिस्पॉन्डिंग टू लॉस एंड डैमेज’ को पत्र लिखकर जलवायु न्याय के सिद्धांत के तहत आपातकालीन मुआवजे की मांग की थी। इस पत्र के जवाब में कोष के बोर्ड ने नेपाल को जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराने के लिए विचार-विमर्श और समन्वय किए जाने की जानकारी दी थी।

जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के उद्देश्य से स्थापित संयुक्त राष्ट्र के इस कोष के संचालन बोर्ड की बैठक वर्चुअल माध्यम से होगी। बैठक में नेपाल के लिए 2 करोड़ डॉलर और आपदा की निगरानी एवं प्रबंधन के लिए 16 लाख डॉलर सहित कुल 2 करोड़ 16 लाख अमेरिकी डॉलर अस्थायी रूप से आवंटित करने के प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाएगा।नेपाल ने भोटेकोशी बाढ़ से हुए नुकसान के बाद 31 अगस्त को कोष से आपातकालीन सहायता मांगी थी। अल्पविकसित देशों, अफ्रीकी देशों और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रतिनिधियों के दबाव तथा नागरिक समाज की लगातार पैरवी के बाद कोष के सह-अध्यक्षों ने यह विशेष बैठक बुलाई है।

बैठक में कोष से सहायता मांगने की मौजूदा लंबी और जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। ऐसी व्यवस्था लागू होने पर आपदा के बाद नियमित आवेदन प्रक्रिया के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की बाध्यता समाप्त होने की उम्मीद है।

नेपाल की आपातकालीन सहायता की मांग पर चर्चा से पहले कोष में लंबी प्रक्रियागत बहस हुई थी। 16 सितंबर को संचालन बोर्ड का अनौपचारिक परामर्श हुआ, जबकि 28 सितंबर को पर्यवेक्षकों के साथ चर्चा की गई। इसके बाद 5 और 8 अक्टूबर को प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने के लिए बैठकें हुईं। इस दौरान कुछ विकसित देशों के प्रतिनिधियों ने औपचारिक बैठक के बजाय अनौपचारिक चर्चा के जरिए ही इस मामले को सुलझाने का सुझाव भी दिया था।

नेपाल की सहायता मांग के करीब दो महीने बाद विशेष बैठक बुलाए जाने से आपदाओं के बाद आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने में अंतरराष्ट्रीय तंत्र की प्रक्रियागत सुस्ती भी उजागर हुई है। इस सुस्ती को दूर करने और सहायता वितरण की प्रक्रिया को सरल एवं तेज बनाने की मांग सदस्य देशों के बीच उठ रही है।राष्ट्रीय योजना आयोग के प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार, भोटेकोशी बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में करीब 79 अरब 60 करोड़ नेपाली रुपये की क्षति होने का अनुमान है।

नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के जलवायु क्षति एवं नुकसान कोष को भेजे पत्र में बताया था कि भोटेकोशी बाढ़ से कम से कम 2 अरब 69 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर नुकसान हुआ है। इसके पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 4 अरब 71 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है।

पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कुल राशि की तुलना में नेपाल को प्रस्तावित सहायता 0.5 प्रतिशत से भी कम है। यह जलवायु परिवर्तन से होने वाली आपदाओं से प्रभावित देशों की जरूरतों और उन्हें मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता के बीच बड़े अंतर को दर्शाता है।

मांग की तुलना में सहायता की राशि काफी कम होने के कारण जलवायुजनित आपदाओं से प्रभावित देशों को अपनी जरूरतों के अनुरूप मदद मिलना मुश्किल हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी कोष में उपलब्ध राशि को बेहद कम बताते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में विकसित देशों से इसमें पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की अपील की थी।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page