न्यायपालिका को कोई भी डरा नहीं सकता’, राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर सीजेआई की टिप्पणी

न्यायपालिका को कोई भी डरा नहीं सकता’, राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर सीजेआई की टिप्पणी
Facebook WhatsApp

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडी गठबंधन के नेताओं की याचिका पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।इस याचिका में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है।

इसके साथ ही अदालत ने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता। कोर्ट ने गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के खिलाफ याचिका पर राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को भी नोटिस जारी किया है।

सीजेआई ने मार्च और उसके दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और कहा कि याचिकाकर्ता राहुल गांधी को इस पर सफाई देनी होगी।सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, अन्य निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी किया। नोटिस जारी करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में भी पूछताछ करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दायर याचिका और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा दायर एक अलग याचिका पर भी नोटिस जारी किया है।सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन पर पाबंदियों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार ने अपने कदम का बचाव किया है और इसके पीछे के कारण हलफनामे में बताए हैं।


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें इस पर स्पष्टीकरण देना होगा। फिलहाल राहुल गांधी की तरफ से कोर्ट में कपिल सिब्बल पेश हो रहे हैं।एसआईआर से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुवनाई होगी, जबकि प्रदर्शन पर पाबंदियों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई अलग-अलग हो रही है।

गौरतलब है कि बीते 12 अक्टूबर, सोमवार को राहुल गांधी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर एक मार्च निकाला, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। योजना यह थी कि विपक्षी नेता स्वयं याचिका प्रस्तुत करेंगे, लेकिन चूंकि मार्च से पहले सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री बंद होने वाली थी, इसलिए याचिका वकीलों के माध्यम से दाखिल की गई।हालांकि, याचिका दाखिल करने के बाद भी, नेता सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री पहुंचे, जिससे सुप्रीम कोर्ट परिसर में भारी भीड़ और अफरा-तफरी मच गई।


सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि यह अस्वीकार्य है कि सर्वोच्च न्यायालय को एक राजनीतिक जुलूस से निपटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में जो कुछ हुआ वह नहीं होना चाहिए था और घटना को लेकर वकीलों में व्याप्त आक्रोश का जिक्र किया।


भाटिया ने अदालत को बताया कि लगभग 200 वकीलों ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके चिंता व्यक्त की है कि इस तरह का आचरण धमकी के बराबर है। जिस पर सीजेआई ने जवाब दिया- कोई हमें धमका नहीं सकता।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page