नौसेना में शामिल हुआ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘मंगरोल’

नौसेना में शामिल हुआ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘मंगरोल’
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बंदरगाहों और तटीय रास्तों की सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी, बड़े फ्लीट ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी

नई दिल्ली । कोच्चि के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में निर्मित तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘मंगरोल’ आज औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के समुद्री बेड़े का हिस्सा बन गया।मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में इंडक्शन सेरेमनी में कमीशन किया गया यह जहाज भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमताओं को मजबूत करेगा, जहां तटीय पानी में बड़े वॉरशिप को ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके शामिल होने से नौसेना की पोर्ट, हार्बर और तटीय रास्तों की सुरक्षा करने की क्षमता बढ़ने के साथ ही बड़े फ्लीट ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी।

मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में इस सेरेमनी की अध्यक्षता वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने की। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नौसेना और रक्षा अधिकारी, रक्षा मंत्रालय और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि और देसी हथियार और सेंसर बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने के बंदरगाह मंग्रोल के नाम पर निर्मित यह जहाज पूर्ववर्ती आईएनएस मंग्रोल (एम-85) की विरासत को आगे बढ़ाता है। जहाज के नामकरण से नौसेना ने अपने पूर्व युद्धपोतों की विरासत को संरक्षित करने की परंपरा को जारी रखी है। इस पूर्ववर्ती जहाज ने 07 अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना की सेवा की थी।रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री से बना मंगरोल युद्धपोत डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और एडवांस्ड हथियारों और सेंसर के इंटीग्रेशन में भारत की बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक है। सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत 80 फीसदी स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह जहाज, डिफेंस शिपबिल्डिंग में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। तटीय और उथले पानी में पानी के नीचे के खतरों का पता लगाने और उनका मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया मंगरोल मॉडर्न हथियारों और सेंसर से लैस है, जिसमें अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, एक स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल हैं।

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के मुताबिक आईएनएस मंगरोल में एडवांस्ड सोनार, टॉरपीडो और एएसडब्ल्यू रॉकेट लगे हैं, ताकि तटीय पानी में सबमरीन का शिकार किया जा सके। वाटर जेट प्रोपल्शन वाले तीन डीजल इंजन से चलने वाला यह जहाज उथले पानी में ऑपरेशन के लिए बहुत ज्यादा मैनूवरेबिलिटी देता है। यह पानी के नीचे निगरानी, कम इंटेंसिटी वाले समुद्री ऑपरेशन और माइन वारफेयर से जुड़े काम करने में भी सक्षम है। यह जहाज सबमरीन खतरों का पता लगाने और उनका मुकाबला करने के लिए मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और दूसरे वॉरशिप के साथ काम कर सकता है। बदलते समुद्री सुरक्षा माहौल में पानी के नीचे बढ़ते खतरों के बीच मंगरोल का शामिल होना नौसेना की एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमताओं को मजबूत करने में एक अहम मील का पत्थर है।

anand prakash

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