सुशासन निवेशकों के भरोसे और जनविश्वास को कायम रखने वाला अदृश्य ढांचा : उपराष्ट्रपति

सुशासन निवेशकों के भरोसे और जनविश्वास को कायम रखने वाला अदृश्य ढांचा : उपराष्ट्रपति
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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के (आईसीएसआई) स्थापना दिवस समारोह में कहा कि सुशासन निवेशकों के भरोसे और जनविश्वास को कायम रखने वाला अदृश्य ढांचा है।प्रौद्योगिकी निर्णय लेने के तरीके को बदल सकती है लेकिन ईमानदारी, जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदारी मानवीय ही रहेंगे। उन्होंने कंपनी सचिवों को सुशासन का प्रहरी और भारतीय कंपनियों के विश्वास तंत्र का केंद्र बताया।

उपराष्ट्रपति रविवार को यहां भारत मंडपम में भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) के 58वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संस्थान के करीब छह दशक के सफर की सराहना की और पारदर्शी, नैतिक तथा समावेशी कॉरपोरेट सुशासन को मजबूत करने में उसके योगदान की प्रशंसा की। कार्यक्रम में आईसीएसआई के अध्यक्ष सीएस पवन चंडक, राज्यसभा की पूर्व सदस्य डॉ. सोनल मान सिंह और संस्थान के सचिव सीएस आशीष मोहन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

उन्होंने कहा कि सुशासन नागरिकों की देखभाल और जनविश्वास की रक्षा के लिए जरूरी है। लोग जब कर का भुगतान करते हैं तो जिम्मेदार शासन की अपेक्षा रखते हैं। इसी तरह निवेशक चाहते हैं कि कंपनियां बेहतर कॉरपोरेट सुशासन के माध्यम से उनके हितों की रक्षा करें।

भारतीय कंपनी सचिव संस्थान पारंपरिक नियामकीय अनुपालन से आगे बढ़कर सुशासन को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण संस्थान बन गया है।राधाकृष्णन ने कहा कि संस्थान में आया बदलाव कंपनी सचिव के पेशे के विकास को भी दर्शाता है। आज यह पेशा कॉरपोरेट पारदर्शिता, निवेशकों के भरोसे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत आंकड़ा विश्लेषण और तेजी से बदलते कारोबारी मॉडल के दौर का उल्लेख करते हुए कंपनी सचिवों से कानूनी, रणनीतिक और नैतिक आधार को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी सूचना तैयार करने और निर्णयों में सहायता करने के तरीके को बदल सकती है लेकिन ईमानदारी, जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदारी की भूमिका मनुष्य की ही रहेगी।

राधाकृष्णन ने युवाओं के लिए इस पेशे में प्रवेश के अधिक अवसर पैदा करने की जरूरत बताई। उन्होंने भारतीय कंपनी सचिव संस्थान की शुल्क माफी संबंधी पहलों की सराहना की और विद्यार्थियों तक पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए अनुपालन कैलेंडर 2027 जारी किया।

उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नए उद्यमों के लिए संस्थान की पहलों की भी सराहना की।उन्होंने शहीद की बेटी पहल के तहत राष्ट्रीय रक्षा कोष और रक्षा मंत्रालय के सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जब नीयत अच्छी होती है तो सबकुछ अच्छा होता है।

anand prakash

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