आईयूजे ने नेपाल में प्रेस व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थित को लेकर चिंता जताई

आईयूजे ने नेपाल में प्रेस व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थित को लेकर चिंता जताई
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काठमांडू। इंटरनेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईयूजे) ने नेपाल में प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थिति लगातार कमजोर होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल के दिनों में काठमांडू के विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रवेश द्वार पर वाहन खड़े कर अवरोध उत्पन्न किए जाने की घटनाओं के बाद संगठन ने यह प्रतिक्रिया दी है।आईयूजे ने बुधवार को एक बयान में कहा कि जेन-जी आंदोलन के बाद हुए चुनाव से बनी वर्तमान सरकार के कदमों ने मीडिया जगत में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा किया है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली घटनाओं में वृद्धि हुई है।

आईयूजे ने कांतिपुर मीडिया ग्रुप, ऑनलाइनखबर और हिमालय टेलिविजन जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के प्रवेश द्वारों पर अनधिकृत रूप से अवरोध खड़ा किए जाने की निंदा की है। संगठन ने पत्रकार किशोर श्रेष्ठ को दी गई धमकियों और उन्हें हिरासत में लेने के प्रयास की भी आलोचना की है।बयान में आरोप लगाया गया है कि सरकार निजी मीडिया संस्थानों को सरकारी विज्ञापनों से वंचित करने की नीति अपना रही है। संगठन ने कहा कि ऐसे कदम स्वतंत्र पत्रकारिता को हतोत्साहित करते हैं और मीडिया बहुलवाद को कमजोर करने वाला वातावरण तैयार करते हैं।

आईयूजे ने यह भी चिंता जताई कि इन घटनाओं के कारण नेपाल में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के बीच सेल्फ-सेंसरशिप की प्रवृत्ति बढ़ रही है। संगठन के अनुसार प्रतिशोध, भय और धमकियों के कारण पत्रकारों को समाचारों के प्रकाशन और प्रसारण में संयम बरतना पड़ रहा है, जिससे नागरिकों के सूचना के अधिकार और लोकतांत्रिक सुशासन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

anand prakash

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